हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर की सड़कों पर ट्रैफिक संभालने और लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करने वाली ‘ट्रैफिक गर्ल’ के नाम से चर्चित शुभी जैन ने अब खुद पुलिस विभाग के व्यवहार पर सवाल खड़े किए हैं। शुभी ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट कर अपने साथ हुई कथित बदसलूकी का दर्द बयां किया है। शुभी का दावा है कि वह सिग्नल पर ड्यूटी कर रही थीं। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी और ई-रिक्शा चालक के बीच विवाद हुआ। शुभी का कहना है कि उनकी भूमिका विवाद को बढ़ने से रोकने और सड़क पर रोड रेज को रोकने की थी, लेकिन इसी दौरान उनके साथ कथित तौर पर अपमानजनक तरीके से बात की गई। सबसे ज्यादा आपत्ति शुभी ने उस कथित टिप्पणी पर जताई, जिसमें उनसे कहा गया—‘आपसे कौन बात कर रहा है, आप लेडीज जात हैं, आप मुझसे बात न करें।’

जिस पुलिस के लिए जनता से भरोसा बनाने निकली थीं, उसी पुलिस पर उठाया सवाल

शुभी वीडियो में कहती हैं कि वह बतौर ट्रैफिक वार्डन हमेशा लोगों से प्यार और मुस्कान के साथ बात करने की कोशिश करती हैं। उनका कहना है कि शायद इसी वजह से सिग्नल से गुजरने वाले लोगों के बीच उनके प्रति भरोसा बना है।लेकिन इस घटना ने उन्हें इसलिए परेशान किया क्योंकि वह खुद पुलिस के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाने की कोशिश करती हैं।शुभी ने कहा कि एक वालंटियर के तौर पर उनकी कोशिश रहती है कि लोग इंदौर ट्रैफिक पुलिस या पुलिस व्यवस्था से नफरत न करें, बल्कि पुलिस को अपनी सुरक्षा और मदद के लिए मौजूद व्यवस्था के तौर पर देखें। लेकिन सवाल यही है—जब पुलिसकर्मी ही आम आदमी से सम्मान से बात नहीं करेगा तो जनता पुलिस पर भरोसा कैसे करेगी?

‘लेडीज जात’ वाली टिप्पणी पर शुभी का दर्द

शुभी के मुताबिक विवाद के दौरान उन्होंने लोगों को लड़ने से रोकने की कोशिश की। उनका कहना है कि रोड रेज दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन सकता है, इसलिए सिग्नल पर उनका काम ही लोगों को विवाद से रोकना और ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करना है।लेकिन उनके अनुसार इसी दौरान पुलिसकर्मी ने उनकी बात को नजरअंदाज करते हुए कथित तौर पर ‘लेडीज जात’ जैसी टिप्पणी की। शुभी ने अपने वीडियो में इस व्यवहार पर खुलकर नाराजगी जताई।

बिना वर्दी बाइक पर बैठे पुलिसकर्मी ने कैसे बनाया चालान?

शुभी ने एक और गंभीर सवाल उठाया। उनका दावा है कि संबंधित व्यक्ति वर्दी में नहीं था और अपनी बाइक पर बैठकर पीछे चल रहे ई-रिक्शा की फोटो खींच रहा था। शुभी ने वीडियो में कहा कि अगर कोई व्यक्ति ट्रैफिक पुलिस में नहीं है तो वह खुद से किसी का चालान नहीं बना सकता।हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संबंधित पुलिसकर्मी की पहचान, उस समय उसकी ड्यूटी और चालान बनाने की वास्तविक प्रक्रिया की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।यही वजह है कि शुभी की ओर से लगाए गए इन आरोपों की जांच होना जरूरी है।

आप पुलिस हैं तो आम जनता से ऐसा व्यवहार नहीं कर सकते

शुभी ने वीडियो में साफ कहा कि उन्हें इंदौर ट्रैफिक पुलिस पर गर्व है और विभाग के साथ उनका अब तक अच्छा अनुभव रहा है।उनका सवाल किसी एक पुलिसकर्मी से नफरत का नहीं, बल्कि पुलिस और जनता के बीच भरोसे का है।उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति पुलिस के पास अपनी परेशानी लेकर तभी जाएगा, जब उसे भरोसा होगा कि पुलिस उसकी मदद करेगी।अगर पुलिस की वर्दी या पहचान के नाम पर आम जनता को ही अपमानित किया जाएगा, तो पीड़ित पुलिस के पास अपनी शिकायत लेकर कैसे पहुंचेगा?

शुभी बोलीं—‘हम चाहते हैं पुलिस लोगों के लिए हीरो बने

वीडियो में शुभी ने कहा कि उनकी कोशिश है कि पुलिस को देखकर आम लोगों के मन में सुरक्षा का भाव आए।उनके मुताबिक पुलिस ऐसी होनी चाहिए कि किसी व्यक्ति को परेशानी होने पर वह सबसे पहले पुलिस को याद करे और भरोसे के साथ उसके पास पहुंचे।लेकिन उनका कहना है कि अगर पुलिस विभाग के ही लोग आम जनता के साथ इस तरह का व्यवहार करेंगे, तो पुलिस के प्रति भरोसा कमजोर होगा।उन्होंने स्पष्ट किया कि वीडियो बनाने का उद्देश्य किसी पुलिसकर्मी के प्रति नफरत पैदा करना नहीं है, बल्कि विभाग के भीतर इस तरह के व्यवहार पर ध्यान दिलाना है।

ट्रैफिक गर्ल’ ने पुलिस को ही आईना दिखा दिया!

शुभी जैन का यह वीडियो अब सिर्फ उनके साथ कथित बदसलूकी का मामला नहीं रह गया है। यह सवाल सीधे पुलिस-पब्लिक रिलेशन और ट्रैफिक व्यवस्था में जनता के भरोसे से जुड़ गया है।एक तरफ पुलिस लगातार लोगों से ट्रैफिक नियमों का पालन करने, कानून का सम्मान करने और पुलिस के साथ सहयोग करने की अपील करती है।दूसरी तरफ अगर पुलिसकर्मी पर ही आम जनता से कथित अभद्र व्यवहार के आरोप लगें, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।शुभी का सवाल बेहद सीधा है—जब हम चाहते हैं कि जनता पुलिस को अपना रक्षक माने, तो पुलिस को भी जनता के साथ सम्मान और संवेदनशीलता से पेश आना होगा।अब देखना होगा कि शुभी जैन के लगाए आरोपों पर पुलिस विभाग क्या संज्ञान लेता है और क्या संबंधित पुलिसकर्मी के व्यवहार व कथित चालान प्रक्रिया की जांच होती है।क्योंकि पुलिस का असली प्रभाव सिर्फ चालान काटने में नहीं, बल्कि जनता के भीतर यह भरोसा पैदा करने में है कि—मुसीबत में पुलिस हमारे साथ खड़ी होगी।

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