कुंदन कुमार/पटना। सरकार द्वारा सुगम यातायात के दावे और करोड़ों रुपये की लागत से तैयार बख्तियारपुर-नवादा-रजौली फोरलेन परियोजना उद्घाटन के महज एक साल बाद ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि सड़क पर बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं और पुल का पिलर भी क्षतिग्रस्त हो गया है।

​निर्माण में बरती गई लापरवाही, मची अफरातफरी

​स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों के अनुसार, ‘गाबर कंपनी’ द्वारा किए गए निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसका प्रमाण सड़क पर आई मोटी दरारें और पिलर संख्या 150 का क्षतिग्रस्त बैरिंग है। जानकारों का कहना है कि मानक के अनुरूप काम न होने की वजह से सड़क अपनी आयु से बहुत पहले ही जवाब दे गई है। लोगों का आक्रोशित सवाल है कि यदि महज एक साल में सड़क की यह दुर्गति है, तो आने वाले समय में यह कितनी खतरनाक साबित होगी?

​’फोरलेन’ सिमट कर ‘टू लेन’ में बदली

​सड़क की बदहाली का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। सुरक्षा कारणों से फोरलेन को अब ‘टू लेन’ में परिवर्तित कर दिया गया है। इससे न केवल वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है, बल्कि जाम की समस्या के कारण यात्रियों का सफर लंबा और कष्टकारी हो गया है।

​दो महीने तक और परेशानी झेलेंगे यात्री

​पेटी कॉन्ट्रैक्टर के कर्मियों ने जानकारी दी है कि सड़क और पिलर की मरम्मत कार्य पूरा करने में कम से कम दो महीने का समय लगेगा। तब तक वाहन चालकों को इसी टू लेन की जद्दोजहद से गुजरना होगा। जहां सरकार सड़क निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं इस तरह की लापरवाही सरकारी खजाने और जनता के समय, दोनों की बर्बादी है। फिलहाल, संबंधित अधिकारियों और संवेदक की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं, और लोग अब दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।