कुंदन कुमार/ पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिए की गई अपील का असर अब बिहार की राजनीति में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राज्य में ऊर्जा बचत और प्रदूषण कम करने की दिशा में एक नई संस्कृति विकसित हो रही है। इस पहल की शुरुआत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा अपने काफिले को छोटा करने से हुई, जिसके बाद राज्य के मंत्रियों और अधिकारियों में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है।

​सादगी और संकल्प का संदेश

​इसी क्रम में, आज बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री श्रवण कुमार ने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया। वे स्वयं ‘नो व्हीकल डे’ (वाहन मुक्त दिवस) का पालन करते हुए अपने आवास से पैदल ही सचिवालय के लिए निकले। बिना किसी सुरक्षा काफिले और सरकारी गाड़ी के उन्हें पैदल चलते देख स्थानीय लोग भी आश्चर्यचकित और प्रभावित हुए। मंत्री का यह कदम आम जनता को ईंधन बचाने और पैदल चलने के स्वास्थ्य लाभों के प्रति जागरूक करने का एक सशक्त प्रयास है।

​बदलता जा रहा है सरकारी कामकाज का तरीका

​प्रधानमंत्री की अपील का असर केवल प्रतीकात्मक नहीं रहा है। अब बिहार के कई मंत्री दफ्तर आने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों या ई-ऑटो का उपयोग कर रहे हैं। राज्य के कई मंत्रियों ने अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करते हुए सप्ताह में एक या दो दिन ‘नो व्हीकल डे’ घोषित कर दिया है। सरकार के इस सामूहिक प्रयास से न केवल ईंधन की बचत हो रही है, बल्कि यह संदेश भी जा रहा है कि सुशासन और मितव्ययता सरकार की प्राथमिकता है।
​मंत्री श्रवण कुमार का यह ‘नो व्हीकल’ वाला रूप सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जो दर्शाता है कि यदि नेतृत्व अपनी आदतों में बदलाव लाए, तो समाज में बड़े परिवर्तन आसानी से लाए जा सकते हैं।