शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके अभ्यर्थियों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से राजधानी भोपाल पहुंचे वर्ग-2 और वर्ग-3 के शिक्षक अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। अपनी पीड़ा सरकार तक पहुंचाने के लिए अभ्यर्थियों ने जनजाति कार्य विभाग से लेकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) तक दंडवत यात्रा निकालकर अनोखा प्रदर्शन किया।

अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें?

आंदोलन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने मुख्य रूप से दो मांगें रखी हैं। वर्ग 2 (Class 2): रिक्त पदों को भरने के लिए कम से कम 10,000 पदों की बढ़ोतरी की जाए। वर्ग 3 (Class 3): प्राथमिक शिक्षकों के लिए 25,000 पद वृद्धि की मांग की जा रही है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग और जनजाति कार्य विभाग में इस समय करीब 1 लाख 25 हजार पद खाली पड़े हैं, इसके बावजूद युवाओं को नियुक्तियों के लिए भटकना पड़ रहा है।

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2023 से अटका है भविष्य, नहीं मिला स्कूल एलॉटमेंट

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वर्ष 2023 में शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें प्रदेश भर से लगभग पौने दो लाख (1.75 लाख) अभ्यर्थी शामिल हुए थे। लंबी प्रक्रिया के बाद सरकार ने महज 10,700 पदों पर भर्ती निकाली थी। हैरानी की बात यह है कि परीक्षा पास करने और नाम चयन सूची में आने के बावजूद इन पदों पर भी फिलहाल अब तक जॉइनिंग नहीं हो सकी है। स्कूल एलॉटमेंट (School Allotment) न होने के कारण चयनित अभ्यर्थी केवल दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

विभाग के बाहर भारी प्रदर्शन

अपनी सुस्त रफ्तार और उदासीनता को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले जनजाति कार्य विभाग के बाहर अभ्यर्थियों ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल युवाओं का कहना है कि जब तक सरकार पद वृद्धि और तुरंत नियुक्ति को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाती, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा। इस आंदोलन ने एक बार फिर प्रदेश की लचर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के रोजगार के मुद्दे को गरमा दिया है।

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