शब्बीर अहमद, भोपाल। देश के सबसे बड़े शिक्षा और भर्ती घोटालों में से एक ‘व्यापमं घोटाले’ (Vyapam Scam) को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला यह है कि व्यापमं के दर्जनों अलग-अलग मुकदमों में जांच एजेंसी ने केवल एक ही व्यक्ति को मुख्य गवाह बना दिया। यह ‘पक्का’ गवाह कोई रसूखदार शख्स नहीं, बल्कि पेशे से पुताई (पेंटर) का काम करने वाला सुनील कुशवाह है, जो व्यापमं की हर खबर पर पैनी नजर रखता है।
847 आरोपी और सिर्फ ‘एक’ गवाह
हैरान करने वाली बात यह है कि सुनील कुशवाह अकेले 847 आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों में सरकारी गवाह है। नियमानुसार अलग-अलग मामलों में निष्पक्ष और स्वतंत्र गवाह होने चाहिए, लेकिन एसटीएफ ने व्यापमं के अलग-अलग केसों में इसी एक चेहरे का इस्तेमाल किया। पार्टी और कानूनी जानकारों का दावा है कि कई महत्वपूर्ण मामलों में यह गवाह अदालत के भीतर अपने बयानों से पलट (Hostile) चुका है, जिसका सीधा असर कोर्ट के फैसलों पर पड़ा है और कई आरोपी तकनीकी रूप से बच निकलने में कामयाब रहे।
इन बड़ी परीक्षाओं के मामलों में बनाया गया गवाह
सुनील कुशवाह को वर्ष 2011 से 2013 के बीच आयोजित हुईं लगभग सभी बड़ी परीक्षाओं के फर्जीवाड़े में गवाह बनाया गया था, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं। चिकित्सा नियुक्तियां: प्री-मेडिकल टेस्ट (PMT) 2012 व 2013, प्री-पीजी (Pre-PG) परीक्षा 2012। पुलिस एवं सुरक्षा बल: पुलिस आरक्षक भर्ती 2012, पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा 2012, परिवहन आरक्षक परीक्षा 2012। शिक्षक व अन्य नियुक्तियां: संविदा शाला शिक्षक ग्रेड-2 व ग्रेड-3 पात्रता परीक्षा 2011, दुग्ध संघ भर्ती परीक्षा 2012, खाद्य नागरिक आपूर्ति परीक्षा 2012।
आरोपियों को बचाने के लिए STF ने तैयार किया था प्लान- कांग्रेस
इस पूरे घालमेल पर कांग्रेस के पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने सरकार और तत्कालीन जांच एजेंसी को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा- आरोपियों को पिछले दरवाजे से बचाने के लिए एसटीएफ की तरफ से यह एक सोची-समझी प्लानिंग थी। जानबूझकर अलग-अलग व्यापमं केसों में सिर्फ एक ही व्यक्ति को गवाह बना दिया गया ताकि कोर्ट में केस टिक न सके। अगर उस समय व्यापमं घोटाले के दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती, तो आज देश में ‘नीट’ (NEET) का पेपर दो-दो बार लीक नहीं होता और न ही देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य अधर में लटकता।

