भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी के बाहरी इलाके बालियांता में हुए बर्बर हत्याकांड की जांच में एक चौंकाने वाला एंगल सामने आया है। सौम्य रंजन स्वाईं की मौत महज एक अचानक भड़की भीड़ का गुस्सा (मॉब लिंचिंग) थी या इसके पीछे कोई सोची-समझी साजिश (प्री-प्लान्ड मर्डर) थी, इसे लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, सौम्य रंजन की हत्या में शामिल आरोपियों का संबंध उस ग्रुप से था, जो घटना के तुरंत बाद मुख्य गवाह और पीड़ित के करीबी सहयोगी ओम प्रकाश राउत के बुलावे पर मौके पर पहुंचा था।

मामले के मुख्य आरोपी रंजित पात्रा से पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं को कई अहम सुराग मिले हैं। पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि रंजित का संपर्क ओम प्रकाश और कुणाल नाम के एक अन्य युवक से था। इस खुलासे के बाद अब कुणाल भी पुलिस की रडार पर आ गया है।

जांचकर्ताओं के मुताबिक, घटना के वक्त ओम प्रकाश ने फोन कर कुणाल से मदद मांगी थी और उसे क्राइम स्पॉट पर बुलाया था। लेकिन कुणाल वहां अकेला नहीं पहुंचा; उसके साथ रंजित पात्रा भी आया था, जिस पर सौम्य रंजन के साथ बेरहमी से मारपीट करने और उसकी जान लेने का मुख्य आरोप है।

इस नए खुलासे के बाद क्राइम ब्रांच अब रंजित, कुणाल और ओम के बीच के असली कनेक्शन को खंगाल रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह वारदात मौके पर पैदा हुए हालातों की वजह से हुई या फिर इसके पीछे पहले से तैयार कोई खौफनाक ब्लूप्रिंट था।

जांच को तेज करते हुए क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने कुणाल और ओम प्रकाश दोनों को हिरासत में लेकर मैराथन पूछताछ शुरू कर दी है, ताकि इस हत्याकांड की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

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