पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड मामले में सज़ा काट रहे बलवंत सिंह राजोआणा जेल से महज तीन घंटे के पैरोल पर बाहर आए। इस दौरान वे अपने गांव राजोआणा कलां पहुंचे, जहां उन्होंने अपने भाई की अंतिम अरदास में हिस्सा लिया।
राजोआणा ने गुरुद्वारे में उपस्थित संगत को संबोधित करते हुए सिख संस्थाओं की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “दुश्मनों के हाथ सिखों की गर्दन तक पहुंच चुके हैं, लेकिन सिख अभी भी नहीं जाग रहे हैं।”
गांव की मिट्टी से जुड़ी यादें
राजोआणा ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने इन्हीं खेतों में खेला और खेती की है। उन्होंने कहा, “दशमेश पिता जी की चरणछोह से धन्य इस भूमि का कोई कण मेरे माथे पर लगा होगा।” उन्होंने अपनी बहन कमलजीत कौर की सराहना करते हुए कहा कि वह एक सच्चे योद्धा की तरह उनके संघर्ष में साथ खड़ी हैं।
सज़ा स्वीकार की थी
राजोआणा ने बताया कि जब 12 साल मुकदमा चलने के बाद अदालत ने उन्हें फांसी की सज़ा सुनाई, तो उन्होंने उसी वक्त अदालत में कहा था, *”जज साहब, आपकी सुनाई सज़ा मुझे मंज़ूर है। आप अगली प्रक्रिया शुरू करें।” उन्होंने अदालत को लिखित में दिया कि वह इस फैसले को चुनौती नहीं देंगे।

18 साल से न्याय का इंतजार
राजोआणा ने कहा कि पंथ ने उनकी सज़ा पर रोक तो लगवा दी, लेकिन वह सज़ा अभी भी बरकरार है। वह 18 साल से अपने फैसले का इंतजार कर रहे हैं और इस अन्याय को सहन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक हमारी संस्थाएं मज़बूत नहीं होंगी, तब तक हमारे अधिकार भी मज़बूत नहीं हो सकते।
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