Bangladesh Will be Join Mecca Defence Pact: भारत के लिए चिंता करने वाली खबर सामने आई है। भारत के तीन तरफ से घिरा और पड़ोसी देश बांग्लादेश इस्लामिक नाटो (Islamic NATO) यानी मक्का डिफेंस पैक्ट में शामिल हो सकता है। सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट में शामिल होने को लेकर बांग्लादेश ने सकारात्मक रुख दिखाया है। मक्का डिफेंस पैक्ट में शामिल होने की संभावना पर बांग्लादेश ने कहा कि यह हमारे मुस्लिम परिवार का आंतरिक मामला है। इससे दूसरे देशों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। बांग्लादेश का इशारा भारत की तरफ था।

विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट में शामिल होने से उसे कोई जोखिम नजर नहीं आता। इस समझौते में शामिल होना बांग्लादेश के दूसरे देशों के साथ संबंधों को सीमित नहीं करेगा। कबीर ने विदेश मंत्रालय में सऊदी अरब के राजदूत अब्दुल्ला जफर बिन अबियाह से मुलाकात के बाद मीडिया से बात की।

हुमायूं कबीर ने कहा कि यह एक ऐसा समझौता है, जो बांग्लादेश के सामने नए अवसर पैदा कर सकता है। उनके मुताबिक, मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए बांग्लादेश को अपनी विदेश नीति और सुरक्षा सहयोग को ज्यादा लचीले और एकीकृत तरीके से आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है और सभी द्विपक्षीय साझेदारों के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अपनी अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में संतुलन बनाए रखेगा। कबीर के मुताबिक, किसी एक समझौते में शामिल होने से बांग्लादेश के विकल्प खत्म नहीं होंगे।

बांग्लादेश ने क्या कहा?

वहीं बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने इससे पहले संसद में कहा था कि अगर बांग्लादेश को इस समझौते में शामिल होने का न्योता मिलता है तो वह इसे सकारात्मक रूप से देखेगा। उन्होंने इसे “हमारे मुस्लिम परिवार का आंतरिक मामला” बताया था और कहा था कि दूसरे देशों को इससे चिंतित होने की जरूरत नहीं है। हालांकि, बांग्लादेश को अभी तक औपचारिक तौर पर इस समझौते में शामिल होने का प्रस्ताव नहीं मिला है।

क्या है मक्का पैक्ट

बता दें कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त को मक्का में जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता पश्चिम एशिया में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच हुआ है। समझौते का मकसद तीनों देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा और सैन्य सहयोग को मजबूत करना है। समझौते में कहा गया है कि तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होने पर उसे सभी के खिलाफ हमला माना जाएगा। मक्का अल-मुकर्रमा समिट फॉर जॉइंट डिफेंस के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

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