कुंदन कुमार/पटना। बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रत्याशी के रूप में नीरज कुमार पर भरोसा जताया है, तो दूसरी तरफ जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर स्वयं इस सियासी रणभूमि में उतरकर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यह मुकाबला वैचारिक और चुनावी रणनीतियों के टकराव के रूप में देखा जा रहा है।

​प्रशांत किशोर का दावा: बीजेपी की होगी करारी हार

​प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने जनता के बीच जाकर यह दावा किया है कि इस बार बांकीपुर की जनता भारतीय जनता पार्टी को सबक सिखाने के लिए पूरी तरह तैयार है। पीके (प्रशांत किशोर) का यहां तक कहना है कि जनता के आक्रोश का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके द्वारा उतारे गए प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो जाएगी।

​बीजेपी का पलटवार: संगठनात्मक ताकत का दम

​वहीं बीजेपी खेमे में भी उत्साह कम नहीं है। हाल ही में जन सुराज छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए गोपाल सिंह ने प्रशांत किशोर के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर इस चुनावी लड़ाई में कहीं भी नहीं हैं। गोपाल सिंह के अनुसार, भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी संगठनात्मक पार्टी है और उसके पास एक मजबूत कैडर बेस है, जो चुनाव परिणामों में स्पष्ट दिखेगा।

​जनहित बनाम व्यक्तिगत उपलब्धि पर छिड़ी जंग

​राजनीतिक बयानों के बीच अब विकास के दावों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बीजेपी की ओर से गोपाल सिंह ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा किया है। उन्होंने अपने परिवार के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके परदादा ने बांकीपुर की जनता को दयानंद बालिका उच्च विद्यालय जैसी धरोहर दी जो एक मील का पत्थर साबित हुई है। इस पर चुटकी लेते हुए उन्होंने प्रशांत किशोर को चुनौती दी कि वे यह बताएं कि उन्होंने या उनके परिवार के किसी सदस्य ने आज तक बांकीपुर की जनता के लिए एक भी ऐसा काम किया है, जिसे याद रखा जा सके।
​अब देखना यह है कि बांकीपुर की जनता विकास के पुराने दावों पर मुहर लगाती है या प्रशांत किशोर के नए विकल्प के वादे को स्वीकार करती है। यह चुनाव परिणाम न केवल दोनों उम्मीदवारों का भविष्य तय करेगा बल्कि बिहार की आगामी राजनीति की दिशा भी तय करेगा।