यमन के हूती विद्रोहियों ने दूसरे देशों को सऊदी अरब का समर्थन न करने की सख्त चेतावनी दी है. पाकिस्तान और तुर्की के सऊदी अरब के समर्थन में लड़ाई में उतरने की संभावना पर यमन के हूती विद्रोहियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. हूतियों ने कहा है कि अगर इन दोनों देशों ने यमन में सऊदी अरब के साथ मिलकर कोई सैन्य दखल दिया, तो उन्हें इसका कड़ा जवाब मिलेगा. वहीं, हूतियों ने अमेरिकी जहाजों पर हमला न करने का भरोसा दिया है.

हूतियों के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को बताया कि उनका संगठन लाल सागर में अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि हमारा इकलौता निशाना सऊदी दुश्मन है और ये स्थिति आगे भी बनी रहेगी.

हूती विद्रोहियों ने पाकिस्तान और तुर्की को सऊदी अरब के समर्थन में युद्ध में ना उतरने के लिए चेताया है. सऊदी से लड़ाई लड़ रहे हूतियों ने पाकिस्तान और तुर्की को सैन्य धमकी देते हुए कहा कि वे सऊदी अरब के समर्थन में यमन में सैन्य रूप से दखल ना दें। ऐसा करने पर हूती उनके लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं.

यह चेतावनी सऊदी अरब पर हूतियों के नए हमलों के बीच सामने आई है. हूती (अंसार अल्लाह) के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य और धमार के गवर्नर मोहम्मद अल-बुखैती ने एक इराकी टीवी कार्यक्रम ‘अनदर रीडिंग’ में यह बात कही.

मोहम्मद अल-बुखैती ने मीडिया को बताया कि इस महीने की शुरुआत में जब हूती लड़ाकों ने यमन के पश्चिमी तट से बाब अल-मंदेब की ओर तेजी से बढ़त बनाई, तो अमेरिका ने उनसे संपर्क किया था. उन्होंने आगे बताया कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ ओमान के जरिए यह अप्रत्यक्ष संपर्क हुआ था.

दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी माना था कि उनकी सरकाक की हूतियों के साथ बातचीत हुई है. ट्रंप ने कहा था, ‘हूतियों ने हमसे संपर्क किया था और वो हमसे लड़ना नहीं चाहते.

वहीं, हूती के वरिष्ठ अधिकारी मोहम्मद अल-बुखैती ने चेतावनी दी कि अगर इस्लामाबाद या अंकारा की ओर से कोई सैन्य दखल होता है तो दोनों देशों को गंभीर और तत्काल सैन्य जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा.

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