Bastar News Update : कोंडागांव. फरसगांव क्षेत्र के एक किसान की मौत ने ग्रामीण अंचलों में बढ़ते मानसिक दबाव की गंभीर तस्वीर सामने रख दी है. जुगानी कैंप निवासी 65 वर्षीय केशव हलधर ने कथित तौर पर जहर सेवन कर आत्महत्या कर ली. जानकारी के अनुसार खेत में फसल अवशेष जलाने के दौरान आग पड़ोसी खेत तक पहुंच गई थी, जिससे मक्का फसल और ड्रिप पाइप को नुकसान हुआ. दोनों पक्षों के बीच नुकसान की भरपाई को लेकर सहमति भी बन गई थी. इसके बावजूद बुजुर्ग किसान लगातार मानसिक तनाव में था. सोमवार को उसका शव जंगल में मिला, जहां से जहर का डिब्बा भी बरामद हुआ. पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है.
भरंडा विवाद के बहाने उठा ‘प्रेस’ बोर्ड और धर्मांतरण का सवाल
जगदलपुर. भरंडा गांव में हुए विवाद ने सिर्फ धर्मांतरण के आरोपों को ही नहीं, बल्कि “प्रेस” लिखे वाहनों के दुरुपयोग पर भी बहस छेड़ दी है. ग्रामीणों के विरोध के बाद मामला मारपीट तक पहुंच गया, जिसमें कई लोगों के घायल होने की सूचना है. ग्रामीणों का आरोप है कि एक वाहन में सवार लोग आदिवासी समाज के लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे थे. हालांकि प्रशासन ने अभी किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं की है. घटना के बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम कर निष्पक्ष जांच की मांग की. भारी पुलिस बल तैनात कर हालात को नियंत्रित किया गया है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर “प्रेस” लिखकर चल रहे वाहनों की वैधता की जांच कौन करेगा. प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी. भरंडा की घटना ने जिलेभर में ऐसे वाहनों की जांच की आवश्यकता को भी उजागर कर दिया है.
जंगल में डंप लौह अयस्क जब्त, अब वन विभाग की कार्रवाई पर नजर
बस्तर. पंडेवार के जंगलों में अवैध रूप से जमा किए गए लौह अयस्क पर आखिरकार प्रशासन ने कार्रवाई कर दी है. कलेक्टर के निर्देश पर खनिज और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने तीन स्थानों से लौह अयस्क जब्त किया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया. ग्रामीणों का आरोप है कि पहाड़ियों से अयस्क निकालकर जंगल में जमा किया गया था और तस्करी की तैयारी चल रही थी. 24 मई को ग्रामीणों ने दो ट्रक और एक जेसीबी पकड़कर प्रशासन को सूचना दी थी. घटना के 15 दिन बाद भी वन विभाग की कार्रवाई स्पष्ट नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं. जांच में यह भी सामने आया कि अयस्क निजी नहीं बल्कि राजस्व भूमि पर डंप किया गया था. अब लोगों की नजर इस बात पर है कि वन विभाग इस मामले में राजसात जैसी कड़ी कार्रवाई करता है या नहीं.
तीन आपदा प्रभावित परिवारों को मिली राहत राशि
जगदलपुर. प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले तीन परिवारों को प्रशासन ने आर्थिक सहायता स्वीकृत की है. कलेक्टर आकाश छिकारा ने राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के तहत 12 लाख रुपये की सहायता राशि मंजूर की है. करपावंड और मेटावाड़ा में डूबने से हुई मौत के मामलों में परिजनों को चार-चार लाख रुपये दिए जाएंगे. वहीं दरभा क्षेत्र के छिंदावाड़ा कावारास गांव में हुई मृत्यु के मामले में आश्रितों को संयुक्त रूप से सहायता मिलेगी. प्रशासन का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देना प्राथमिकता है. इस सहायता से पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद है.
ईवी खरीदारों का बढ़ता इंतजार, सब्सिडी फाइलों में कैद
बस्तर. पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने वाली ईवी नीति अब बजट संकट से जूझती नजर आ रही है. बस्तर क्षेत्र में 2,789 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हो चुका है, लेकिन बड़ी संख्या में खरीदार सब्सिडी का इंतजार कर रहे हैं. डेढ़ साल बाद भी कई उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन राशि नहीं मिल पाई है. परिवहन विभाग के पास सीमित बजट होने से भुगतान प्रक्रिया बेहद धीमी हो गई है. अब तक केवल 1,023 वाहनों के लिए ही सब्सिडी जारी करने की तैयारी हो पाई है. राज्य स्तर पर अतिरिक्त 120 करोड़ रुपये की मांग भेजी गई है. खरीदारों का कहना है कि वाहन खरीदने के बाद अपनी ही राशि के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.
बदहाल सड़क पर सफर हुआ जोखिम भरा
जगदलपुर. घाटकवाली-जूनापारा से घाटलोहंगा तक की सड़क बदहाल हालत में पहुंच चुकी है. करीब 9 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर गड्ढों की भरमार होने से लोगों का आवागमन जोखिम भरा हो गया है. दोपहिया वाहन चालकों को हर दिन दुर्घटना का डर सताता है. यह सड़क लगभग 15 गांवों को मुख्य मार्ग और शहर से जोड़ती है. ग्रामीणों का कहना है कि बरसात से पहले मरम्मत नहीं हुई तो हालात और बिगड़ जाएंगे. कुड़कानार पुलिया चौक के पास कई हिस्से खतरनाक बन चुके हैं. ग्रामीण लगातार सड़क सुधार की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस पहल नहीं हो सकी है.
पीएम आवास के नाम पर वसूली का आरोप, गरीब परिवार अब भी इंतजार में
बीजापुर. भोपालपटनम ब्लॉक के दम्मूर गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं. तत्कालीन सचिव पर दो आदिवासी हितग्राहियों से 40-40 हजार रुपये लेने का आरोप लगा है. पीड़ितों का कहना है कि मकान निर्माण के नाम पर राशि ली गई, लेकिन केवल नींव खोदकर काम छोड़ दिया गया. एक साल बीत जाने के बाद भी न मकान बना और न ही पैसा वापस मिला. मामले ने पंचायत स्तर की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. शिकायत मिलने के बाद जनपद पंचायत ने संबंधित सचिव और सरपंच को नोटिस जारी किया है. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे की कार्रवाई की बात कही गई है.

एक साल बाद भी नहीं बन सकी पुलिया, गांवों का संपर्क अब भी अधूरा
बस्तर. बस्तानार ब्लॉक में इरपा मार्ग की बह चुकी पुलिया एक साल बाद भी पुनर्निर्माण का इंतजार कर रही है. अगस्त 2025 की बाढ़ में यह पुलिया बह गई थी, जिससे कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ. ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें कीं, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका. विभाग का तर्क है कि पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है. इसी तरह सोसनपाल और चितापुर क्षेत्रों में भी सड़क और पुलों की मरम्मत अधूरी पड़ी है. कई जगह बच्चे अस्थायी लकड़ी के पुल से स्कूल जाने को मजबूर हैं. बारिश के मौसम में दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि विकास के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं की यह स्थिति चिंता का विषय है.
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