Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर में ‘नया खानी’ (नवाखाई) तिहार की शुरूआत हो गई है, नवखाई से पूर्व जगदलपुर के घाटकवाली में स्थानीय ग्रामीणों ने सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए इंद्रावती नदी के तट पर एकत्रित होकर एक विशेष सेवा अर्जी का आयोजन किया, इस अवसर पर ग्रामीणों ने जल की देवी, जलनी (माता) आया को श्रद्धापूर्वक सोने की नाव और चांदी का पतवार भेंट की, इस अनोखी भेंट के साथ ही ग्रामीणों ने सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और बिना किसी विघ्न-बाधा के नया खानी त्यौहार को हर्षोल्लास के साथ मनाने के लिए जलनी आया से अनुमति मांगी. आस्था और परंपरा का अनूठा संगम बस्तर के जनजातीय समाज में कृषि और प्रकृति से जुड़े त्यौहारों का विशेष महत्व है. ‘नया खानी’ तिहार नई फसल के आने की खुशी में मनाया जाता है, जिसमें खेतों से आई नई फसल (धान) का भोग सबसे पहले देवी-देवताओं और पूर्वजों को लगाया जाता है, घाटकवाली गांव की मान्यता के अनुसार, इंद्रावती नदी और उनकी देवी ‘जलनी आया’ घाटकवाली की जीवनदायिनी हैं, ग्रामीणों का अटूट विश्वास है कि जलनी आया की अनुमति और आशीर्वाद के बिना कोई भी शुभ कार्य पूर्ण नहीं हो सकता, यही कारण है कि पुरखों से चली आ रही परंपरा अनुसार सोने की नाव और चांदी का पतवार अर्पित कर जलनी आया को प्रसन्न किया गया, ताकि गांव पर उनका आशीर्वाद हमेशा बना रहे, पारंपरिक अनुष्ठान के दौरान गांव के बैगा, सिरहा, पुजारी और मांझी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण इंद्रावती नदी के घाट पर एकत्रित हुए, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच पूजा की रस्में पूरी की गईं.

चित्रकोट जलप्रपात में जर्जर सीढ़ी से हादसे का खतरा

जगदलपुर. चित्रकोट जलप्रपात की खूबसूरती देखने पहुंच रहे पर्यटकों के लिए तीरथा की ओर बनी सीढ़ियां परेशानी का कारण बन रही हैं. प्रपात के नीचे जाने के लिए बनाई गई यह सीढ़ियां लंबे समय से जर्जर हालत में हैं. एक स्थान पर सीढ़ी पूरी तरह टूट चुकी है और सरियों के सहारे लकड़ी बांधकर लोग आवाजाही कर रहे हैं. ऐसे में किसी भी समय सीढ़ी टूटने से हादसा होने का खतरा बना हुआ है. तीरथा की ओर सोमवार को पार्वती कोंटा में पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं.
इसके अलावा पिंडदान और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए भी लोगों का यहां आना-जाना लगा रहता है. मछुआरे भी रोजाना इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं, जिससे सीढ़ियों पर लगातार दबाव बना रहता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के कुछ साल बाद ही सीढ़ियों की यह स्थिति सवाल खड़े करती है. इन दिनों पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बीच जर्जर सीढ़ियां सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठा रही हैं. पर्यटकों ने प्रशासन से तत्काल मरम्मत कराने और सुरक्षित आवाजाही की व्यवस्था करने की मांग की है. सवाल यह है कि किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई होगी या उससे पहले ही जिम्मेदार इस ओर ध्यान देंगे.

पंचायतों की राशि को लेकर दरभा में प्रदर्शन, 15 दिन का अल्टीमेटम

जगदलपुर. दरभा ब्लॉक मुख्यालय में पंचायतों को मिलने वाली विकास राशि और अन्य मांगों को लेकर शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन हुआ. बस्तर क्रान्तिकारी विचार मंच के बैनर तले जनपद सदस्य, सरपंच और ग्रामीण चक्काजाम कर सड़क पर उतर आए. प्रदर्शनकारियों ने वर्ष 2023 से 2026 तक गौण खनिज मद की पंचायतवार राशि सार्वजनिक करने की मांग की. उनका कहना है कि पंचायतों को विकास के लिए मिलने वाली राशि के वितरण में पारदर्शिता होनी चाहिए. 16वें वित्त और डीएमएफ की राशि से विकास कार्य कराने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी गई. प्रधानमंत्री आवास योजना में आवास निर्माण और राशि आहरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठी. ग्राम पंचायत कड़मा में करीब 55 लाख रुपए की कथित वित्तीय अनियमितता की जांच का मुद्दा भी प्रदर्शन में उठाया गया. मंच के संस्थापक सदस्य एवं पूर्व जनपद सदस्य मुन्नालाल कश्यप ने प्रशासन को 15 दिन का समय दिया है. जनपद सदस्य बलिराम बघेल ने मांगें पूरी नहीं होने पर दरभा से जगदलपुर तक पदयात्रा की चेतावनी दी. प्रदर्शनकारियों ने पंचायत प्रतिनिधियों के सम्मान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया. अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर है, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने 15 दिन बाद आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है.

15 लाख के जिम उपकरण खराब, उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला

कोंडागांव. जिम के लिए खरीदे गए करीब 15 लाख रुपए के उपकरणों की खराबी ने उपभोक्ता विवाद का रूप ले लिया. उपभोक्ता की शिकायत के बावजूद खराब उपकरणों की समय पर मरम्मत या उन्हें बदलने की कार्रवाई नहीं हुई. मामला बस्तर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग तक पहुंचा, जहां आपूर्तिकर्ता को सेवा में कमी का दोषी माना गया. आयोग के मुताबिक शिकायत के बाद भी उपकरणों की खराबी दूर नहीं की गई, जिससे उपभोक्ता को परेशानी हुई. कोंडागांव निवासी लतीश देवांगन ने ओडिशा के कटक स्थित महावीर जिम इंडस्ट्रीज से उपकरण मंगवाए थे. शिकायत में समय पर आपूर्ति नहीं होने और खराब उपकरण भेजे जाने का भी उल्लेख किया गया. आयोग ने आपूर्तिकर्ता को सभी जरूरी उपकरणों की मरम्मत एक माह के भीतर कराने का आदेश दिया है. आदेश का पालन नहीं होने पर हर दिन 100 रुपए का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है. इसके अलावा आर्थिक क्षति के लिए 50 हजार रुपए और मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपए देने होंगे. मामले में उपभोक्ता को 5 हजार रुपए मुकदमा खर्च के रूप में भी देने का आदेश हुआ है. फैसला उपभोक्ता अधिकारों और खराब सेवा के खिलाफ शिकायत की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण संदेश देता है.

6 लाख से ज्यादा स्क्रीनिंग, 891 मरीजों में गंभीर सिकल सेल की पुष्टि

जगदलपुर. बस्तर में सिकल सेल बीमारी की पहचान के लिए चल रही स्क्रीनिंग में बड़ी संख्या में मरीज सामने आए हैं. 31 अगस्त तक जिले में 6 लाख 17 हजार 552 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है. यह निर्धारित 5 लाख 82 हजार 631 के लक्ष्य का 106 प्रतिशत है. स्क्रीनिंग में सिकल सेल के गंभीर रूप एसएस के 891 मरीज चिन्हित किए गए हैं. इनमें सबसे ज्यादा 141 मरीज बकावंड, 134 तोकापाल और 97 जगदलपुर ग्रामीण क्षेत्र में मिले हैं. कुल 891 मरीजों में 596 बस्तर जिले के हैं, जबकि 295 मरीज अन्य जिलों या राज्यों से संबंधित बताए गए हैं. स्क्रीनिंग में 8,065 एएस वाहक भी चिन्हित किए गए हैं, जिससे जागरूकता और नियमित जांच की जरूरत सामने आती है. स्वास्थ्य विभाग अब चिन्हित मरीजों का दस्तावेजीकरण कर उन्हें उपचार और सरकारी योजनाओं से जोड़ने में जुटा है. विशेषज्ञ परिवार में बीमारी का इतिहास होने पर जांच और विवाह से पहले दोनों पक्षों की स्क्रीनिंग की सलाह दे रहे हैं. मेकाज अधीक्षक डॉ. अनुरूप साहू के मुताबिक समय पर जांच और चिकित्सकीय परामर्श से बीमारी के जोखिम को समझने में मदद मिलती है. बस्तर में स्क्रीनिंग का आंकड़ा लक्ष्य से आगे निकलना अभियान की पहुंच दिखाता है, लेकिन मरीजों के नियमित फॉलोअप की चुनौती भी सामने है.

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