श्रावस्ती. उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में सरकारी तालाब की जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने मुख्यमंत्री आवास योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इकौना देहात में प्रशासन ने नौ मकानों को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया. प्रभावित परिवारों का दावा है कि उन्हें वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत इन्हीं मकानों का लाभ मिला था. अब प्रशासन इन्हें तालाब की सुरक्षित सरकारी जमीन पर बना अतिक्रमण बता रहा है.
सरकारी योजना से घर मिला, फिर अवैध कैसे हुआ?
पीड़ित परिवारों का कहना है कि जब सरकार की योजना के तहत उन्हें मकान दिए गए, तब जमीन को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई गई. परिवारों के मुताबिक वे कई पीढ़ियों से यहां रह रहे थे. ऐसे में उनका सवाल है कि यदि जमीन सरकारी तालाब की थी तो आवास योजना का लाभ देते समय इसका सत्यापन कैसे हुआ? अब मकानों को अतिक्रमण बताकर गिराए जाने से सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं.
कभी 25 तो कभी 35 मीटर की हुई पैमाइश
प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब एक महीने से उनकी जमीन की बार-बार पैमाइश की जा रही थी. कभी सड़क से 25 मीटर और कभी 35 मीटर तक जमीन को तालाब की सीमा बताया गया. ग्रामीणों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष दोबारा पैमाइश की मांग की है.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन की कार्रवाई
प्रशासन के मुताबिक मामला गाटा संख्या 2393ख और 2394ग की 0.145 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा है, जो खतौनी में तालाब खाते की सुरक्षित भूमि दर्ज है. तहसीलदार ने 13 अगस्त को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश के तहत नौ लोगों को नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने को कहा था. 18 अगस्त को भी कार्रवाई हुई थी, लेकिन अतिक्रमण पूरी तरह नहीं हट सका था. इसके बाद बचा निर्माण ध्वस्त कराया गया.
कार्रवाई के बाद अब सामने आया पुनर्वास का सवाल
बुलडोजर कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने की जगह का संकट खड़ा हो गया है. महिलाओं और बच्चों के रोने-बिलखने की तस्वीरों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन परिवारों को सरकारी योजना के तहत घर मिला, उनकी पात्रता और जमीन का सत्यापन किस स्तर पर हुआ था.
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प्रशासन ने तालाब की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया है, लेकिन अब सरकार से यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि आवास आवंटन से पहले भूमि की जांच क्यों नहीं हुई और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की क्या व्यवस्था होगी.



