Bastar News Update : बीजापुर. बीजापुर-नारायणपुर सीमा के हिसतांगुड़ा (मेटाडी) के जंगलों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की एक बड़ी साजिश को समय रहते विफल कर दिया. सीआरपीएफ की 199वीं, 85वीं बटालियन और 202 कोबरा की संयुक्त टीम ने सर्च ऑपरेशन के दौरान छह आईईडी और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की. जंगल में छह अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखे गए कॉर्डेक्स वायर, डेटोनेटर, गन पाउडर, रेडियो सेट और इलेक्ट्रिक उपकरण जब्त किए गए. जवानों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर अत्यंत सतर्कता के साथ तलाशी अभियान चलाया. समय रहते कार्रवाई होने से किसी भी जवान या ग्रामीण को नुकसान नहीं पहुंचा. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि बरामद सामग्री किसी बड़ी नक्सली वारदात के लिए तैयार की गई थी. लगातार अभियानों से नक्सलियों की पकड़ इस इलाके में कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है. संयुक्त अभियान में विभिन्न सुरक्षा इकाइयों ने समन्वय के साथ कार्रवाई को अंजाम दिया. बरामद विस्फोटकों को सुरक्षित तरीके से जब्त कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है. सुरक्षा बलों ने स्पष्ट किया है कि जंगलों में ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे. लक्ष्य केवल हथियार बरामद करना नहीं, बल्कि नक्सलियों की पूरी रणनीति को कमजोर करना है. बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों का दबाव लगातार बढ़ने से नक्सली नेटवर्क सिमटता नजर आ रहा है.जंगल में मिला हथियारों का डंप, नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटकानारायणपुर. नारायणपुर जिले के ओरछा थाना क्षेत्र के पदगुंडा-करसेनार के जंगल में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों का छिपाया गया हथियारों और विस्फोटकों का डंप बरामद किया है. आईटीबीपी की 44वीं वाहिनी और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने अभियान के दौरान बड़ी सफलता हासिल की. बरामद सामग्री में 12 बोर रायफल, 55 कारतूस, स्थानीय निर्मित 51 मिमी मोर्टार शेल, लोहे के भाले, बैटरी और अन्य तकनीकी सामग्री शामिल है. माओवादी संगठन का झंडा भी मौके से जब्त किया गया. सुरक्षा एजेंसियां बरामद हथियारों की तकनीकी जांच में जुट गई हैं. लगातार सर्च ऑपरेशन के कारण नक्सलियों के पुराने हथियार डंप अब सामने आ रहे हैं. पुलिस का कहना है कि स्थानीय लोगों के सहयोग से अभियान को लगातार सफलता मिल रही है. ग्रामीणों से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस तक पहुंचाने की अपील की गई है. सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने का भरोसा भी दिया गया है. बरामद सामग्री को वैधानिक प्रक्रिया के तहत जब्त कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है. सुरक्षा बलों का मानना है कि इस कार्रवाई से भविष्य की संभावित हिंसक घटनाओं को रोका जा सकेगा. नारायणपुर में नक्सल विरोधी अभियान लगातार और अधिक प्रभावी होता नजर आ रहा है.  

देवशयनी एकादशी पर मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता 

जगदलपुर. देवशयनी एकादशी पर बस्तर के श्री जगन्नाथ मंदिर और बालाजी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं और चातुर्मास का शुभारंभ होता है. धार्मिक परंपरा के अनुसार इस अवधि में सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव संभालते हैं. मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और अभिषेक का आयोजन किया गया. बालाजी मंदिर में भगवान बालाजी, श्रीदेवी और भूदेवी का दूध एवं दिव्य द्रव्यों से अभिषेक हुआ. पूजा के बाद श्रद्धालुओं को महाप्रसाद का वितरण किया गया. बस्तर ही नहीं, पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास में तप, जप और साधना का विशेष महत्व माना जाता है. इसी अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं. भक्तों ने भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी से सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की. मंदिर परिसर पूरे दिन भक्ति और श्रद्धा के माहौल से सराबोर रहा. आस्था के इस पर्व ने एक बार फिर बस्तर की धार्मिक परंपराओं को जीवंत कर दिया.

राशन कार्ड सेवाएं हुईं डिजिटल, अब घर बैठे होगा आवेदन

नारायणपुर. नारायणपुर जिले के राशन कार्ड हितग्राहियों के लिए अब सरकारी सेवाएं पहले से अधिक आसान हो गई हैं. नया राशन कार्ड बनवाना, परिवार के सदस्य का नाम जोड़ना या हटाना अब पूरी तरह ऑनलाइन किया जा सकेगा. सेवा-सेतु पोर्टल के माध्यम से नागरिक घर बैठे आवेदन कर सकेंगे. ऑनलाइन सुविधा का उपयोग नहीं कर पाने वाले लोग नजदीकी चॉइस सेंटर में मात्र 30 रुपये शुल्क देकर आवेदन करा सकेंगे. आवेदन के बाद मोबाइल पर एप्लिकेशन नंबर भेजा जाएगा. इसी नंबर से आवेदन की स्थिति कभी भी ट्रैक की जा सकेगी. सत्यापन पूरा होने पर डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त राशन कार्ड जारी किया जाएगा. हितग्राही इसे पोर्टल से डाउनलोड भी कर सकेंगे. राशन कार्ड जारी होने के बाद सभी सदस्यों का ई-केवाईसी कराना अनिवार्य होगा. ई-पॉस मशीन या फेस ई-केवाईसी के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इस व्यवस्था से पात्र परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ समय पर मिल सकेगा. डिजिटल प्रक्रिया से पारदर्शिता और सुविधा दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है.

अवैध गोवंश परिवहन पर पुलिस की सख्त कार्रवाई

नारायणपुर. नारायणपुर जिले में अवैध गोवंश परिवहन के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 45 गोवंश से भरे वाहन को जब्त किया है. कार्रवाई के दौरान चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया. सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है. प्रारंभिक जांच में सामने आया कि गोवंश बिना वैध दस्तावेजों के परिवहन किया जा रहा था. पुलिस ने वाहन और सभी गोवंश को मौके पर ही अपने कब्जे में ले लिया. आरोपियों के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है. पुलिस का कहना है कि अवैध परिवहन के संगठित नेटवर्क पर भी नजर रखी जा रही है. जंगल और ग्रामीण मार्गों के जरिए होने वाली गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. जिले में अवैध गोवंश परिवहन के मामलों पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अभियान चलाया जा रहा है. पुलिस ने लोगों से भी ऐसी गतिविधियों की सूचना तत्काल देने की अपील की है.

संदिग्ध पगमार्क से दहशत, वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी

जगदलपुर. जगदलपुर से लगे ग्राम गारावंड (खुर्द) में खेत में बड़े आकार के संदिग्ध पगमार्क मिलने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. आशंका जताई जा रही है कि क्षेत्र में तेंदुआ या बाघ जैसे हिंसक वन्यजीव की मौजूदगी हो सकती है. कुछ दिन पहले पास के बिल्लोरी गांव के जंगल में भी ऐसे ही पदचिह्न मिले थे. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी. वन्यजीव की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए थर्मल ड्रोन कैमरों से लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. यह इलाका माचकोट के जंगलों और ओडिशा सीमा से जुड़ा होने के कारण निगरानी और बढ़ा दी गई है. छत्तीसगढ़ और ओडिशा के वन अधिकारी आपसी समन्वय से स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. ग्रामीणों को अकेले जंगल नहीं जाने की सलाह दी गई है. बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की गई है. मवेशियों को सुरक्षित बाड़ों में रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं. किसी भी संदिग्ध गतिविधि या पगमार्क की सूचना तुरंत वन विभाग या पुलिस को देने को कहा गया है. वन विभाग का उद्देश्य संभावित खतरे को समय रहते टालना और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

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