Bastar News Update : जगदलपुर. जगदलपुर के माचकोट वन क्षेत्र में एक दुर्लभ पक्षी की मौजूदगी ने जंगलों की समृद्ध जैव विविधता को फिर सुर्खियों में ला दिया है. लंबी पूंछ वाले नाइटजार, जिसे स्थानीय भाषा में “कापू चड़ई” और हिंदी में “रात की चिड़िया” कहा जाता है, को कैमरे में कैद किया गया है. यह पक्षी दिनभर झाड़ियों और पेड़ों की निचली शाखाओं में छिपकर आराम करता है, इसलिए इसे देख पाना बेहद मुश्किल माना जाता है. रात होते ही यह सक्रिय हो जाता है और उड़ते हुए कीट-पतंगों का शिकार करता है. विशेषज्ञों के अनुसार यह प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण कर किसानों के लिए भी लाभकारी साबित होता है. इसकी विशेष आवाज जंगलों में इसकी उपस्थिति का संकेत देती है. भारत के अलावा चीन, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में भी यह प्रजाति पाई जाती है. वन अधिकारियों का कहना है कि माचकोट क्षेत्र दुर्लभ पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास बनता जा रहा है. इस खोज ने एक बार फिर साबित किया है कि कोंडागांव के जंगल जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं.
CAF जवान की मौत ने ड्यूटी के दौरान मानसिक दबाव पर खड़े किए सवाल
कोंडागांव. उरंदाबेड़ा स्थित सीएएफ कैंप में तैनात एक जवान की आत्मघाती कदम उठाने की घटना ने सुरक्षा बलों के भीतर मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है. ड्यूटी के दौरान जवान जोगेंद्र नेताम ने अपनी सर्विस रायफल से खुद को गोली मार ली. गोली की आवाज सुनते ही कैंप में हड़कंप मच गया और साथी जवान तत्काल मौके पर पहुंचे. गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. प्रारंभिक जांच में मामला निजी कारणों से उपजे तनाव से जुड़ा बताया जा रहा है. घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की. पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है. घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करने वाले जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर कितना ध्यान दिया जा रहा है. जांच रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे.
खनन से पहले जंगल पर चोट, आलनार पहाड़ी में पेड़ों की कटाई पर कार्रवाई
दंतेवाड़ा. बैलाडीला क्षेत्र की आलनार पहाड़ी में सड़क निर्माण के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद वन विभाग हरकत में आ गया है. जिस क्षेत्र में खनन परियोजना प्रस्तावित है, वहां एनओसी और पेड़ों की गणना पूरी होने से पहले ही सड़क निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गई. ग्रामीणों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने जब मौके का निरीक्षण किया तो सड़क की चौड़ाई के अनुरूप व्यवस्थित तरीके से कटे हुए पेड़ दिखाई दिए. इसके बाद वन विभाग ने संबंधित कंपनी के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज किया है. अधिकारियों का कहना है कि कटे हुए पेड़ों की संख्या और पर्यावरणीय नुकसान का आकलन किया जा रहा है. स्थानीय लोगों ने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है. यह मामला अब केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खनन परियोजनाओं में पर्यावरणीय नियमों के पालन पर भी सवाल खड़े कर रहा है. आगामी कार्रवाई पर क्षेत्रवासियों और पर्यावरण प्रेमियों की नजरें टिकी हुई हैं.
खाद-बीज कारोबार पर प्रशासन का शिकंजा, किसानों के हित में सख्ती शुरू
बस्तर. खरीफ सीजन शुरू होते ही किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद, बीज और कीटनाशक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी है. जिला स्तर पर विशेष कंट्रोल रूम स्थापित कर भंडारण और वितरण पर लगातार नजर रखी जा रही है. विभाग की ताबड़तोड़ जांच कार्रवाई से अवैध कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है. नियमों के उल्लंघन पर कई दुकानों को नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि अनेक केंद्रों की बिक्री पर रोक लगाई गई है. कुछ लाइसेंस निलंबित और एक लाइसेंस निरस्त भी किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि किसानों के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी या कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए कंट्रोल रूम सक्रिय किया गया है. कृषि विभाग का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य किसानों को सही समय पर गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराना है. प्रशासनिक सख्ती के चलते बाजार में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.
21 जून तक दंतेवाड़ा में ही समाप्त होगी किरंदुल-विशाखापट्टनम पैसेंजर
दंतेवाड़ा. केके रेल लाइन पर चल रहे दोहरीकरण और सुरक्षा उन्नयन कार्यों के चलते दक्षिण बस्तर के रेल यात्रियों को अगले कुछ दिनों तक असुविधा का सामना करना पड़ेगा. रेलवे ने 9 जून से 21 जून तक किरंदुल-विशाखापट्टनम पैसेंजर सेवा को दंतेवाड़ा तक सीमित करने का निर्णय लिया है. इसके चलते किरंदुल जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी होगी. इसके अलावा आगामी महीनों में इंटरसिटी एक्सप्रेस सेवा भी कुछ दिनों के लिए प्रभावित रहेगी. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव सुरक्षा और बेहतर रेल संचालन के लिए किए जा रहे विकास कार्यों का हिस्सा है. हालांकि यात्रियों के लिए यह अस्थायी परेशानी का कारण बन सकता है. दक्षिण बस्तर के कई क्षेत्रों में रेल सेवा ही प्रमुख यातायात साधन है, इसलिए इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा. रेलवे ने यात्रियों से यात्रा से पहले समय-सारणी की जानकारी लेने की अपील की है. कार्य पूरा होने के बाद बेहतर और सुरक्षित रेल सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

अबूझमाड़ में बारिश से पहले विकास की नई राह, 7 पुलों ने बदली 1200 ग्रामीणों की जिंदगी
नारायणपुर. अबूझमाड़ के दुर्गम वनांचल में वर्षों से मानसून के दौरान अलगाव झेल रहे ग्रामीणों के लिए इस बार बारिश राहत लेकर आएगी. आईटीबीपी की 53वीं वाहिनी ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच रिकॉर्ड समय में सात नए लॉग ब्रिज तैयार किए हैं. इन पुलों के निर्माण से 15 से अधिक गांवों के करीब 1200 ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा. हर साल बारिश में उफनते नालों के कारण गांवों का संपर्क टूट जाता था और मरीजों, गर्भवती महिलाओं तथा छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था. ग्रामीणों की मांग पर आईटीबीपी ने जिला प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर यह अभियान चलाया. अब इलाज, शिक्षा और दैनिक आवागमन के लिए जोखिम भरे रास्तों पर निर्भरता कम होगी. स्थानीय लोगों ने इसे वर्षों पुरानी समस्या का समाधान बताया है. सुरक्षा बलों की यह पहल केवल बुनियादी ढांचा निर्माण नहीं बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में जीवन को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है. मानसून से पहले तैयार हुए ये पुल अबूझमाड़ के विकास की नई तस्वीर पेश कर रहे हैं.
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