Bastar News Update : जगदलपुर. जगदलपुर में एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव एक परिवार की खुशियां छीन ले गया. बोधघाट थाना क्षेत्र के आड़ावाल खासपारा में रहने वाली 20 वर्षीय युवती ने शुक्रवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. बताया जा रहा है कि युवती पिछले तीन वर्षों से नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थी और लगातार प्रयास कर रही थी. इस वर्ष भी उसने परीक्षा दी थी और हाल ही में घोषित हुए परिणाम से वह बेहद निराश थी. परिजनों के मुताबिक रिजल्ट देखने के बाद से वह तनाव में थी, हालांकि रात तक परिवार के साथ सामान्य रूप से मौजूद थी. रात करीब साढ़े तीन बजे जब उसकी मां कमरे में पहुंची तो बेटी फंदे पर लटकी मिली. परिजन तत्काल उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. सूचना मिलते ही बोधघाट पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. पुलिस को घर से एक कथित सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें परीक्षा परिणाम को लेकर निराशा और अपेक्षाओं का दबाव झलक रहा है. प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है. इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते मानसिक दबाव और युवाओं पर सफलता की अपेक्षाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक रिजल्ट ने सिर्फ एक छात्रा का सपना नहीं तोड़ा, बल्कि एक परिवार की दुनिया भी उजाड़ दी.
उलनार में शव दफन को लेकर विवाद
जगदलपुर. उलनार गांव में एक बार फिर दफन संस्कार को लेकर आदिवासी समाज और मतांतरित परिवार आमने-सामने आ गए. गांव में पहले भी इसी तरह का विवाद सामने आने के बाद इस बार तनाव और बढ़ गया था. ग्रामीणों ने अपनी पारंपरिक मान्यताओं और ग्रामसभा के फैसलों का हवाला देते हुए विरोध जताया. धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों का समर्थन किया. प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में कई दौर की चर्चा हुई. आखिरकार दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने से बड़ा विवाद टल गया. मृतका के परिजन शव को करकापाल कब्रिस्तान ले जाने पर राजी हो गए. इसके बाद पूरे घटनाक्रम का शांतिपूर्ण समाधान निकल सका. ग्रामीणों का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए. पुलिस ने पूरे मामले में शांति बनाए रखने की अपील की. घटना ने आदिवासी परंपराओं और धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर नई बहस छेड़ दी है. अब प्रशासन की कोशिश है कि गांव में दोबारा ऐसा विवाद पैदा न हो.
महतारी वंदन योजना में बड़ा सत्यापन, हजारों अपात्र हितग्राही सूची से बाहर
जगदलपुर. महतारी वंदन योजना में सरकार ने राज्यभर में व्यापक सत्यापन अभियान चलाया है. जांच के बाद बस्तर संभाग के लगभग 14 हजार 891 अपात्र हितग्राहियों के नाम हटाए गए हैं. प्रदेश स्तर पर यह संख्या डेढ़ लाख से अधिक पहुंच चुकी है. सत्यापन में फर्जी दस्तावेज, गलत उम्र और मृत हितग्राहियों के नाम सामने आए. गलत जानकारी देकर लाभ लेने वालों पर प्रशासन ने सख्ती दिखाई है. सरकार का दावा है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक पात्र महिलाओं तक पहुंचाया जाएगा. अब डिजिटल रिकॉर्ड के साथ भौतिक सत्यापन भी अनिवार्य किया गया है. डीबीटी के जरिए मिलने वाली राशि पर निगरानी और मजबूत की गई है. योजना का उद्देश्य जरूरतमंद विवाहित महिलाओं को आर्थिक सहयोग देना है. अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी लगातार जांच जारी रहेगी. इस कार्रवाई से सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश दिखाई दे रही है. अब फर्जी लाभार्थियों पर पूरी तरह शिकंजा कसने की तैयारी है.
करोड़ों की सोलर सिंचाई योजना ठप, किसान फिर बारिश के भरोसे
दंतेवाड़ा. बालूद गांव में करोड़ों रुपये की सोलर सिंचाई परियोजना अब किसानों के किसी काम की नहीं रह गई है. करीब 2 करोड़ 64 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद योजना पिछले एक वर्ष से बंद पड़ी है. बाढ़ में पंप हाउस क्षतिग्रस्त होने के बाद अब तक मरम्मत नहीं हो सकी. 65 किसानों को मिलने वाली सिंचाई सुविधा पूरी तरह प्रभावित हो गई है. जिले में करोड़ों रुपये की अन्य सोलर परियोजनाएं भी तकनीकी खराबी से जूझ रही हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि रखरखाव के लिए तकनीशियन तक उपलब्ध नहीं हैं. किसानों का कहना है कि समय पर मरम्मत होती तो खरीफ सीजन बच सकता था. कम बारिश की आशंका के बीच सिंचाई व्यवस्था ठप होना चिंता बढ़ा रहा है. अब प्रशासन ने संबंधित विभाग को तत्काल मरम्मत के निर्देश देने की बात कही है. किसानों को उम्मीद है कि योजना जल्द दोबारा शुरू होगी. सरकारी निवेश का लाभ जमीन पर नहीं उतरने से सवाल उठ रहे हैं. अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं.
619 वर्ष पुरानी अमनिया भोग परंपरा से गूंजा गोंचा महापर्व
जगदलपुर. गोंचा महापर्व में भगवान जगन्नाथ को अमनिया भोग अर्पित करने की प्राचीन परंपरा शुरू हो गई है. यह परंपरा रियासतकाल से लगातार निभाई जा रही है. 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के 115 से अधिक गांव इसमें सहभागिता निभाते हैं. पहले दिन मटनार-तालुर क्षेत्र के कई गांवों ने भोग अर्पित किया. भोग के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया. अमनिया भोग को शुद्ध और निर्मल अर्पण का प्रतीक माना जाता है. भगवान जगन्नाथ के प्रिय व्यंजनों में पीठा, खीर और अन्य पारंपरिक प्रसाद शामिल हैं. सिरहासार भवन में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है. सत्यनारायण कथा और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी जारी है. ग्रामीण और शहरी श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. यह परंपरा बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को आज भी जीवंत बनाए हुए है. 23 जुलाई तक प्रतिदिन अमनिया भोग और प्रसाद वितरण जारी रहेगा.
उड़ीसा से यूपी जा रही गांजे की खेप पकड़ी, दो अंतर्राज्यीय तस्कर गिरफ्तार
जगदलपुर. नगरनार पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. उड़ीसा से उत्तर प्रदेश भेजी जा रही गांजे की खेप बरामद की गई. दो अंतर्राज्यीय तस्करों को धनपुंजी फॉरेस्ट नाका के पास गिरफ्तार किया गया. आरोपियों के कब्जे से 12 किलो 700 ग्राम अवैध गांजा जब्त हुआ. बरामद मादक पदार्थ की कीमत करीब 6 लाख 35 हजार रुपये आंकी गई है. मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर कार्रवाई को अंजाम दिया. दोनों आरोपी उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी बताए गए हैं. एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया. न्यायालय ने आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया. पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है. बस्तर को तस्करी का ट्रांजिट रूट बनने से रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है. अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा.
सामूहिक दुष्कर्म मामले के दोषी को उम्रकैद की सजा
कोंडागांव. केशकाल के चर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में विशेष न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है. मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी गई है. अन्य चार दोषियों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया गया. सभी आरोपियों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है. न्यायालय ने पीड़िता को 51 हजार रुपये प्रतिकर देने का आदेश दिया. घटना वर्ष 2024 में आंवरी गांव में हुई थी. पुलिस ने जांच पूरी कर समय पर न्यायालय में चालान पेश किया था. साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी माना. फैसले को महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है. इससे गंभीर अपराधों में त्वरित न्याय का संदेश गया है. प्रशासन ने भी फैसले का स्वागत करते हुए कानून के प्रति भरोसा जताया. पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद अब पूरी हुई है.

नक्सल क्षेत्र में आईटीबीपी ने बनाया जीवनरेखा पुल, गांवों को मिली नई राह
बीजापुर. दुर्गम जाटलूर क्षेत्र में आईटीबीपी ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर नया फुट सस्पेंशन ब्रिज तैयार किया है. करीब 250 फीट लंबे इस पुल से बरसात में आवागमन आसान हो जाएगा. अब ग्रामीणों, विद्यार्थियों और सुरक्षा बलों को उफनते नाले से राहत मिलेगी. पुल का निर्माण स्थानीय संसाधनों और श्रमदान से किया गया है. लोकार्पण के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले जवानों को सम्मानित भी किया गया. नव-निर्मित पुल का नाम शहीद अमोल माधव राव महस्के के नाम पर रखा जाएगा. यह फैसला उनके सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से लिया गया है. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि शामिल हुए. सिविक एक्शन कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को साइकिलें भी वितरित की गईं. ग्रामीणों को स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई. यह पहल विकास और सुरक्षा के बेहतर समन्वय का उदाहरण बन रही है. दुर्गम इलाकों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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