Bastar News Update : बस्तर के प्रसिद्ध तीरथगढ़ जलप्रपात का एक वायरल वीडियो अब पर्यटन से ज्यादा सुरक्षा व्यवस्था की चर्चा का विषय बन गया है। जलप्रपात में प्रतिबंध के बावजूद कुछ पर्यटक नहाते दिखाई दिए, जिन्हें रोकने पहुंचे वन कर्मचारियों से विवाद हो गया।
देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ी कि मामला कथित मारपीट तक पहुंच गया। घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर खतरनाक क्षेत्रों में नियमों का पालन क्यों नहीं हो पा रहा। करीब 50 फीट ऊंचे तीरथगढ़ जलप्रपात में स्नान पहले से प्रतिबंधित है। इसके बावजूद रोमांच की चाह में पर्यटक अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चेतावनी बोर्ड और निगरानी को और प्रभावी बनाने की जरूरत है। दूसरी ओर नियम लागू कराने के तौर-तरीकों पर भी बहस छिड़ गई है। वायरल वीडियो के आधार पर दरभा पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। वन विभाग भी घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रहा है। यह घटना साफ संकेत देती है कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा नियमों का पालन सबसे बड़ी प्राथमिकता होना चाहिए। प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद तभी सुरक्षित है, जब पर्यटक भी अपनी जिम्मेदारी समझें।
नकली खाद पर शिकंजा, किसानों की शिकायत बनी कार्रवाई की वजह
बस्तर में किसानों की शिकायतों ने कृषि विभाग को बड़ी कार्रवाई करने पर मजबूर कर दिया है। उर्वरक नियमों के उल्लंघन के आरोप में एक कृषि केंद्र का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। जांच में प्रथम दृष्टया उर्वरक नियंत्रण आदेश के उल्लंघन की पुष्टि हुई। इसके बाद संबंधित संचालक के खिलाफ फ्रेजरपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। एक अन्य मामले में बिना वैध लाइसेंस के डीएपी के नाम पर दूसरे उर्वरक बेचने का आरोप सामने आया। साथ ही निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने की भी शिकायत मिली।
बोधघाट थाने में भी आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ है। कृषि विभाग ने साफ किया है कि किसानों के साथ किसी तरह की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग लगातार खाद, बीज और कीटनाशकों की गुणवत्ता पर नजर रखे हुए है। किसानों से अपील की गई है कि अधिक कीमत या संदिग्ध सामग्री मिलने पर तुरंत शिकायत करें। समय पर शिकायत मिलने से दोषियों पर तत्काल कार्रवाई संभव होगी। विभाग का कहना है कि कृषि सीजन में किसानों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
आरटीई पर सवाल, मुफ्त शिक्षा के अधिकार पर फीस का दबाव?
बस्तर। जगदलपुर में शिक्षा के अधिकार कानून के पालन को लेकर एक निजी विद्यालय विवादों में आ गया है। एक अभिभावक ने आरोप लगाया है कि आरटीई के तहत पढ़ रहे छात्र पर फीस और बस सुविधा लेने का दबाव बनाया जा रहा है। शिकायत के अनुसार ऐसा नहीं करने पर विद्यालय छोड़ने की चेतावनी दी गई। मामला जिला शिक्षा अधिकारी तक पहुंचने के बाद विभाग हरकत में आया।
संबंधित स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। साथ ही जिले के सभी निजी विद्यालयों को आरटीई नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निःशुल्क शिक्षा का अधिकार प्राप्त है। सरकार इन छात्रों की फीस का भुगतान निर्धारित व्यवस्था के तहत करती है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क की मांग नियमों के खिलाफ मानी जाती है। जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जांच में आरोप सही पाए गए तो कड़ी कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ने पर विद्यालय की मान्यता समाप्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला निजी स्कूलों में आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल बन गया है।
बारिश की बेरुखी से बढ़ी चिंता, सूखे की आशंका ने किसानों की नींद उड़ाई
बस्तर संभाग में मानसून की सुस्ती अब किसानों की सबसे बड़ी चिंता बन गई है। दंतेवाड़ा को छोड़ अधिकांश जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। पिछले कई दिनों से बारिश नहीं होने से खेतों का पानी तेजी से सूख रहा है। जहां धान की रोपाई हो चुकी है, वहां जमीन में दरारें पड़ने लगी हैं। मानसून आधारित खेती करने वाले किसान अब आसमान की ओर उम्मीद लगाए बैठे हैं। अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो सूखे जैसी स्थिति बनने का खतरा बढ़ सकता है। तालाब और जलाशयों में भी अपेक्षित जलभराव नहीं हो पाया है।
जुलाई का आधा महीना गुजरने के बावजूद झमाझम बारिश का इंतजार जारी है। उमस और गर्मी ने आम लोगों की परेशानी भी बढ़ा दी है। पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल अभी भी जारी है। किसानों को उम्मीद है कि गोंचा महापर्व के दौरान मौसम मेहरबान होगा। फिलहाल पूरा बस्तर मानसून की अगली बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
आस्था की राह हुई आसान, जगदलपुर से पुरी के लिए विशेष ट्रेन रवाना
बस्तर के श्रद्धालुओं के लिए बुधवार की सुबह उत्साह और आस्था से भरी रही। जगदलपुर रेलवे स्टेशन से विशेष ट्रेन पुरी के लिए रवाना हुई। जय जगन्नाथ के जयघोष के बीच यात्रियों ने खुशी के साथ सफर शुरू किया। सीधी रेल सेवा मिलने से श्रद्धालुओं का लंबा और कठिन सफर काफी आसान हो गया है। यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेलवे और आरपीएफ ने विशेष सुरक्षा व्यवस्था की। प्लेटफॉर्म पर लगातार सुरक्षा संबंधी घोषणाएं भी की गईं।
आरपीएफ ने यात्रियों को अपने सामान की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी। अनजान लोगों से खाने-पीने की वस्तु नहीं लेने की अपील भी की गई। किसी भी संदिग्ध वस्तु की सूचना तुरंत रेलवे पुलिस को देने को कहा गया। उधर पुरी स्टेशन पर भी श्रद्धालुओं के स्वागत की विशेष तैयारियां की गई हैं। पेयजल और चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यह विशेष ट्रेन बस्तर और भगवान जगन्नाथ की आस्था के बीच नई कड़ी बन गई है।
नशे के नेटवर्क पर करारा वार, घाटी में पकड़ाया गांजा
कोंडागांव जिले की केशकाल पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। नाकेबंदी के दौरान एक कार से 102 किलो से अधिक गांजा बरामद किया गया। बरामद गांजे की कीमत करीब 51 लाख रुपये आंकी गई है। वाहन और नकदी सहित कुल 61 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की गई। आरोपी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का निवासी बताया गया है।
पुलिस के अनुसार गांजा ओडिशा से रायपुर की ओर ले जाया जा रहा था। गुप्त सूचना मिलने पर केशकाल घाटी में विशेष नाकेबंदी की गई थी। तलाशी के दौरान कार की डिक्की से 20 पैकेट बरामद हुए। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। इधर चिखलपुटी बायपास पर पुलिस ने गोवा ब्रांड शराब की बड़ी खेप भी जब्त की है। पुलिस अब पूरे तस्करी नेटवर्क और सप्लाई चेन की जांच में जुटी हुई है।
खेती के मौसम में बिजली संकट, किसानों ने पावर हाउस पहुंचकर जताया आक्रोश
कोंडागांव जिले के हरवेल क्षेत्र में बिजली संकट अब किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। बड़ेराजपुर क्षेत्र के किसान अपनी समस्याएं लेकर पावर हाउस पहुंच गए। किसानों ने आरोप लगाया कि बार-बार बिजली कटने से सिंचाई प्रभावित हो रही है। धान रोपाई के महत्वपूर्ण समय में पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से चिंता बढ़ गई है। विद्युत पंप बंद रहने से खेतों तक पानी पहुंचाने में परेशानी हो रही है। किसानों ने नियमित और तय समय पर बिजली आपूर्ति की मांग की।
उन्होंने अधिकारियों को बताया कि यदि यही स्थिति रही तो फसलों को नुकसान होगा। बड़ी संख्या में किसान पावर हाउस परिसर में एकत्र होकर समाधान की मांग करते रहे। किसानों ने चेतावनी दी कि समस्या दूर नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। विद्युत विभाग के अधिकारियों ने उनकी शिकायतें सुनकर कार्रवाई का आश्वासन दिया। अब किसानों की नजर विभाग के अगले कदम पर टिकी हुई है। खेती के इस अहम दौर में निर्बाध बिजली आपूर्ति किसानों की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

