दंतेवाड़ा। बैलाडीला क्षेत्र में संचालित और प्रस्तावित खनन गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने बड़ा विरोध दर्ज कराया है। ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर डिपॉजिट क्रमांक-4 परियोजना में फर्जी ग्राम सभा और लोक सुनवाई कराने का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय लोगों की सहमति के बिना दस्तावेज तैयार कर खनन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी विकास से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज कर सड़क निर्माण जैसी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। दूसरी ओर आलनार स्थित आरती स्पंज एंड पावर लिमिटेड पर बिना वास्तविक खनन गतिविधि के कागजों में लौह अयस्क उत्पादन और परिवहन दिखाने का आरोप भी लगाया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि खदान क्षेत्र में न मशीनें दिख रही हैं और न ही खनन के स्पष्ट चिन्ह, फिर भी रिकॉर्ड में परिवहन दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे शासन को राजस्व और डीएमएफ मद में नुकसान हो सकता है। ग्रामीणों ने दोनों मामलों में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच, सैटेलाइट सत्यापन और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
केशकाल घाट बायपास से खत्म होगा जाम का संकट
कोंडागांव। बस्तर की लाइफलाइन माने जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशकाल घाटी का जाम लंबे समय से यात्रियों के लिए परेशानी बना हुआ है। अब इस समस्या के समाधान के लिए 308 करोड़ रुपये की लागत से 11.38 किलोमीटर लंबे केशकाल घाट बायपास निर्माण को गति दी जा रही है। परियोजना में दो बड़े और दो मध्यम पुल भी बनाए जाएंगे।
हाल ही में लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने रायपुर-जगदलपुर मार्ग का निरीक्षण कर निर्माण एजेंसी और अधिकारियों को काम जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान बायपास मार्ग में बाधा बने पेड़ों की कटाई और लंबित मुआवजा प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश भी दिए गए।
अधिकारियों का मानना है कि बायपास बनने के बाद घाटी में लगने वाले लंबे जाम से राहत मिलेगी और बस्तर संभाग की यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होगी। यह परियोजना पर्यटन, व्यापार और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी अहम मानी जा रही है।
गर्मी और बारिश के बीच नौतपा की दस्तक से बढ़ेगी मुसीबत
जगदलपुर। 25 मई से शुरू हो रहे नौतपा को लेकर बस्तर संभाग में मौसम का मिजाज और सख्त होने वाला है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि उत्तर-पश्चिम से आने वाली गर्म और शुष्क हवाओं के कारण तापमान में तेज बढ़ोतरी होगी। हालांकि दोपहर बाद बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना भी जताई गई है, लेकिन उमस और गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, पश्चिम बिहार के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण और उत्तर यूपी से तेलंगाना तक फैली द्रोणिका के चलते प्रदेश का मौसम अस्थिर बना हुआ है। नौतपा के दौरान दोपहर में बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
चिकित्सकों ने ज्यादा पानी पीने, बासी भोजन से बचने और धूप में निकलने से परहेज की सलाह दी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करने की अपील भी की गई है। मान्यता यह भी है कि नौतपा जितना तपेगा, मानसून उतना बेहतर होगा। इससे खरीफ फसलों को फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
रेल ट्रायल ने अबूझमाड़ के विकास की उम्मीद बढ़ाई
नारायणपुर। दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना का ट्रायल अब नारायणपुर और अबूझमाड़ के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आया है। पहली बार भारतीय रेल का ‘ऐरावत’ इंजन रावघाट तक पहुंचा, जिससे वर्षों से लंबित रेल कनेक्टिविटी को लेकर लोगों में उत्साह बढ़ गया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अगले दो महीनों में नियमित रेल संचालन शुरू हो सकता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि रेल सेवा शुरू होने से रोजगार, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।
लंबे समय से देश के दूरस्थ इलाकों में गिने जाने वाले अबूझमाड़ क्षेत्र के लिए यह परियोजना विकास की नई राह खोल सकती है। करीब दो दशकों से निर्माणाधीन यह रेल परियोजना अब धरातल पर असर दिखाने लगी है। ट्रायल के दौरान ग्रामीणों में खुशी का माहौल देखा गया और लोगों ने इसे क्षेत्र की बदलती तस्वीर का संकेत बताया।
बारिश से पहले सड़क मरम्मत की मांग तेज
सुकमा। जिले के अधिकारीरास पंचायत अंतर्गत मुरियाभंडाररास से सोनाकुकानार तक की जर्जर सड़क अब ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है। करीब तीन किलोमीटर लंबी मिट्टी-मुरूम सड़क बारिश के दिनों में पूरी तरह बदहाल हो जाती है, जिससे गांव का संपर्क लगभग कट जाता है। ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर सड़क मरम्मत की मांग उठाई।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि बरसात में एम्बुलेंस तक गांव नहीं पहुंच पाती और मरीजों को जिला मुख्यालय ले जाना मुश्किल हो जाता है। बस्तरिया राज मोर्चा अंचल कमेटी के नेतृत्व में पहुंचे ग्रामीणों ने जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की।
कलेक्टर ने समस्या को गंभीर बताते हुए मरम्मत का आश्वासन दिया है। ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी सड़क की स्थिति से अवगत कराया। लोगों का कहना है कि बारिश शुरू होने से पहले सड़क नहीं बनी तो गांवों में फिर आवागमन संकट गहरा जाएगा।
चित्रकोट तीरथा में करोड़ों की सुविधाएं बदहाल
जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के तीरथा क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं की हालत लगातार खराब होती जा रही है। लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई पत्थर सड़क कई जगहों से टूट और उखड़ चुकी है, जिससे पर्यटकों और ग्रामीणों को भारी परेशानी हो रही है। पानी के बहाव वाले हिस्सों में मिट्टी बहने से सड़क का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया, जिसके कारण कुछ ही समय में सड़क जर्जर हो गई। तीरथा क्षेत्र में बनाए गए पैगोड़ा और बैठने की संरचनाएं भी टूट चुकी हैं, जिससे पर्यटकों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण में बाहरी पत्थरों के साथ स्थानीय उबड़-खाबड़ पत्थरों का उपयोग किया गया, जिससे आवागमन और मुश्किल हो गया। उनका कहना है कि यहां सीसी सड़क बनाई जाती तो ज्यादा टिकाऊ रहती। लगातार अनदेखी के कारण पर्यटन क्षेत्र की सुविधाएं अब बदहाली का शिकार होती नजर आ रही हैं।
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