Bastar News Update : नारायणपुर. नारायणपुर में डीजल-पेट्रोल की कमी ने आम जनजीवन की रफ्तार पर सीधा ब्रेक लगा दिया है. सुबह होते ही पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं, जहां ट्रैक्टर से लेकर बाइक तक सड़क तक खड़े नजर आ रहे हैं. घंटों इंतजार के बाद भी पर्याप्त ईंधन नहीं मिलने से लोगों में गुस्सा और बेचैनी बढ़ती जा रही है. सबसे ज्यादा असर रोज कमाने-खाने वाले तबके पर पड़ा है, जिनकी रोजी लाइन में ही खत्म हो रही है. ऑटो चालक, छोटे व्यापारी और मालवाहक वाहन संचालक काम छोड़कर ईंधन के लिए इंतजार करने को मजबूर हैं. शहर में केवल चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर ही ईंधन उपलब्ध है, जिससे वहां भारी दबाव बन रहा है. बाकी पंपों पर सन्नाटा पसरा है और लोग एक पंप से दूसरे पंप तक भटकते नजर आ रहे हैं. किसानों की चिंता भी बढ़ गई है, क्योंकि डीजल के बिना खेती के जरूरी काम ठप पड़ने लगे हैं. कई किसानों को घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है. स्थिति संभालने के लिए प्रशासन ने सीमित वितरण लागू किया है, लेकिन इससे परेशानी और बढ़ गई है. बस सेवाएं और बाजार व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी है, जिससे आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ रही हैं. लोगों की मांग है कि जल्द ईंधन आपूर्ति सामान्य कर राहत दी जाए, वरना हालात और बिगड़ सकते हैं.

सप्लाई ठप, पंप बंद… ईंधन संकट की असली वजह आई सामने

कोंडागांव. जिले में अचानक पेट्रोल-डीजल की किल्लत ने व्यवस्था की पोल खोल दी है. कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन पूरी तरह खत्म हो गया, जिससे लोगों को घंटों भटकना पड़ा. कुछ पंप सुबह से ही बंद नजर आए, जबकि जहां ईंधन मिला वहां लंबी कतारें लग गईं. ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. दोपहिया, चारपहिया और मालवाहक वाहन चालकों की दिक्कतें लगातार बढ़ती जा रही हैं. स्थानीय स्तर पर जानकारी सामने आई है कि टैंकर नहीं पहुंचने से सप्लाई प्रभावित हुई है. पेट्रोल पंप संचालकों ने भी स्टॉक खत्म होने की पुष्टि की है. हालांकि संबंधित विभाग या तेल कंपनियों की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है. इस अनिश्चितता के कारण लोगों में भ्रम और चिंता दोनों बढ़ रहे हैं. व्यापार और परिवहन पर इसका असर साफ दिखाई देने लगा है. यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है. जिलेवासियों ने प्रशासन और तेल कंपनियों से तत्काल व्यवस्था सुधारने की मांग की है.

गंगामुंडा का कायाकल्प : तालाब बनेगा शहर की नई पहचान

जगदलपुर. जगदलपुर के ऐतिहासिक गंगामुंडा तालाब को अब नए स्वरूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत करोड़ों की लागत से सौंदर्याकरण कार्यों का भूमिपूजन किया गया. तालाब को केवल जलाशय नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान के रूप में विकसित किया जा रहा है. पहले किए गए गहरीकरण और घाट निर्माण कार्यों के बाद अब इसे और आधुनिक रूप दिया जाएगा. तालाब के चारों ओर पाथवे और स्ट्रीट लाइट लगाकर इसे आकर्षक बनाया जाएगा. गंदे पानी के प्रवाह को पूरी तरह रोकने और स्वच्छ जल से भरने की योजना है. आने वाले समय में यहां वाटर एडवेंचर और मोटर बोट जैसी सुविधाएं भी शुरू होंगी. करीब 175 एकड़ में फैला यह तालाब धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र है. छठ पर्व जैसे अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. नगर निगम ने इसे शहर का सबसे स्वच्छ और सुंदर तालाब बनाने का लक्ष्य रखा है. अवैध निर्माण पर रोक लगाकर संरक्षण पर भी जोर दिया जाएगा. यह परियोजना शहर के पर्यटन और पहचान को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है.

दलपत सागर में विदेशी मेहमान, लेकिन संरक्षण की चुनौती भी गहरी

जगदलपुर. दलपत सागर इन दिनों प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार हो उठा है. विदेशों से आए पक्षियों ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का आकर्षण बना दिया है. चीन, मंगोलिया, यूरोप और अलास्का जैसे क्षेत्रों से पक्षियों का यहां आगमन हुआ है. स्पॉट बिल्ड पेलिकन, बार हेडेड गूज और रेड क्रीस्टेट पोचार्ड जैसे दुर्लभ पक्षी देखे जा रहे हैं. यह जलाशय जैव विविधता के कारण पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बना हुआ है. साथ ही यह शोध और मत्स्याखेट का भी महत्वपूर्ण केंद्र है. स्थानीय और बाहरी शोधार्थी यहां जलीय जीवन पर अध्ययन कर रहे हैं. लेकिन बढ़ते प्रदूषण और मानवीय हस्तक्षेप ने चिंता बढ़ा दी है. पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह केवल जलाशय नहीं, एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र है. यदि समय रहते संरक्षण नहीं हुआ तो यह विरासत खतरे में पड़ सकती है. आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे बचाना अब जरूरी जिम्मेदारी बन गई है. प्रशासन और नागरिकों से मिलकर संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग उठ रही है.

Bastar News Update : युवाओं को जाल में फंसाने वाले गिरफ्तार

जगदलपुर. शहर में युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने वाले गिरोह पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. बोधघाट थाना क्षेत्र में दो युवकों को प्रतिबंधित नशीली कैप्सूल के साथ गिरफ्तार किया गया. मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा. तलाशी में सैकड़ों ट्रामाडोल कैप्सूल और नगदी बरामद हुई. जब्त दवाओं की कीमत लाखों में आंकी गई है. पूछताछ में आरोपी कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके. पुलिस अब इस नेटवर्क के पीछे जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है. कार्रवाई के बाद नशा कारोबारियों में हड़कंप मच गया है. पुलिस का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों और रिहायशी इलाकों पर खास नजर रखी जा रही है. नशा मुक्त अभियान के तहत जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है. एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया. पुलिस ने साफ किया है कि नशे के कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी.

टेकलगुड़म मुठभेड़, जब रणनीति और तकनीक ने नक्सलियों को पीछे धकेला

सुकमा. टेकलगुड़म में हुआ हमला नक्सल संगठन के इतिहास का आखिरी बड़ा कैम्प अटैक साबित हुआ. हमले के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षाबलों को चारों ओर से घेर लिया था. लेकिन जवानों की रणनीति और साहस ने हालात पलट दिए. ऑल टेरेन व्हीकल का पहली बार प्रभावी उपयोग कर नक्सलियों को करारा जवाब दिया गया. भारी फायरिंग के बीच जवान सीधे एम्बुश तक पहुंच गए और जवाबी हमला किया. इस कार्रवाई में कई नक्सली ढेर हुए और बाकी जंगल की ओर भाग खड़े हुए. अफसरों की सूझबूझ से नक्सलियों का घेरा तोड़ा गया घायल हालात के बावजूद जवानों ने बंकर बचाए और हमला विफल किया. पूर्व नक्सली कमांडर ने भी माना कि इस तकनीक ने उनकी रणनीति तोड़ दी. यह मुठभेड़ सुरक्षा बलों के मनोबल के लिए बड़ी जीत साबित हुई. इसके बाद नक्सली संगठन की हमले की क्षमता पर बड़ा असर पड़ा. यह घटना क्षेत्र में बदलते सुरक्षा परिदृश्य का संकेत भी मानी जा रही है.

Bastar News Update : जंगल के नीचे हथियार फैक्ट्री

बीजापुर. बीजापुर में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के गुप्त ठिकाने का बड़ा खुलासा किया है. गंगालूर क्षेत्र की पहाड़ियों में जमीन के नीचे बने बंकर का पर्दाफाश किया गया. सर्च ऑपरेशन के दौरान बंकर से हथियार बनाने की पूरी व्यवस्था मिली. लेथ मशीन, ड्रिल मशीन और वेल्डिंग उपकरण बरामद किए गए. बिजली के लिए जनरेटर और सोलर सिस्टम का उपयोग किया जा रहा था. यह स्पष्ट संकेत है कि नक्सली जंगल में तकनीकी वर्कशॉप चला रहे थे. बंकर से बीजीएल लॉन्चर और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भी मिली. इससे बड़े हमले की साजिश का अंदेशा जताया जा रहा है. सुरक्षाबलों ने इसे रणनीतिक बड़ी सफलता बताया है. ऑपरेशन में शामिल टीम ने जोखिम उठाकर क्षेत्र की घेराबंदी की. बरामद सामग्री से नक्सल नेटवर्क की गहराई सामने आई है. क्षेत्र में सर्चिंग अभियान और तेज कर दिया गया है.

खाद की बढ़ती मांग और कालाबाजारी, किसानों की चिंता गहराई

बस्तर. खरीफ सीजन से पहले ही बस्तर में खाद की मांग तेजी से बढ़ने लगी है. किसान भविष्य की किल्लत से बचने के लिए अभी से स्टॉक जुटा रहे हैं. मक्का और धान की खेती के चलते यूरिया और डीएपी की जरूरत बढ़ गई है. हर साल सीजन में यूरिया की कमी से किसानों को महंगे दाम चुकाने पड़ते हैं. निजी दुकानों में खाद का भंडारण ज्यादा होने से वहीं भीड़ बढ़ रही है. समितियों में केवल ऋणधारी किसानों को ही खाद मिलने से असमानता बढ़ रही है. निजी दुकानदार तय कीमत से अधिक वसूली कर रहे हैं. डीएपी के दाम पहले ही बढ़कर ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं. मांग बढ़ने के साथ कालाबाजारी का खतरा भी बढ़ गया है. किसान मजबूरी में महंगे दाम पर खाद खरीदने को तैयार हैं. इससे खेती की लागत बढ़ने और मुनाफा घटने का खतरा है. किसानों ने प्रशासन से नियंत्रण और पर्याप्त आपूर्ति की मांग की है.