दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। खाकी का नाम सुनते ही अक्सर मन में डर और सख्ती की तस्वीर उभरती है, लेकिन मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम से ‘खाकी वाले प्यार’ की एक ऐसी मानवीय कहानी सामने आई है, जिसने समाज की सोच को बदल दिया है। यहाँ पुलिस ने समाज की मुख्यधारा से कटे ‘पारधी समुदाय’ के बच्चों के लिए ‘उड़ान’ पहल के तहत एक अनोखे समर कैंप का आयोजन किया। महज एक महीने के भीतर इन बच्चों के जीवन में ऐसा क्रांतिकारी बदलाव आया है कि जो बच्चे कभी गांवों की गलियों में बिना किसी लक्ष्य के घूमते थे, वे आज फर्राटेदार इंग्लिश में अपना परिचय दे रहे हैं और कराटे-पेंटिंग में हुनर दिखा रहे हैं।
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नर्मदापुरम पुलिस ने कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत एसपी साईं कृष्णा थोटा के मार्गदर्शन में वंचित पारधी समुदाय के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ‘उड़ान’ समर कैंप की शुरुआत की। पुलिस वेलफेयर भवन में एक महीने तक चल रहे इस कैंप में सिवनी मालवा और कोटलाखेड़ी के 25 पारधी बच्चों समेत करीब 110 बच्चों ने हिस्सा लिया। बच्चों को हर दिन पुलिस की गाड़ी से 50 किलोमीटर दूर पुलिस लाइन लाया जाता था, जहाँ उनके लिए पौष्टिक भोजन और खेल-कूद की व्यवस्था की गई। इस कैंप का असर जादुई रहा। कभी संकोच में रहने वाले पारधी समाज के बच्चे अब ‘गुड मॉर्निंग सर’ और इंग्लिश में अपना नाम-परिचय देना सीख चुके हैं। कैंप में बच्चों को कराटे, फुटबॉल, कबड्डी, बैडमिंटन, डांस और पेंटिंग का प्रोफेशनल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सामान्य वर्ग और पुलिस परिवार के बच्चों के साथ घुलने-मिलने से इन बच्चों की हीनभावना दूर हुई और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा मिला। अन्य बच्चों ने भी माना कि पारधी बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी और स्टंट्स गजब के हैं।
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कैंप में शामिल गणेश, कायरा और कुलदीप जैसे बच्चों का कहना है कि पुलिस ने उन्हें टाइम मैनेजमेंट, अनुशासन और एक शानदार प्लेटफॉर्म दिया है। वहीं बच्चों के अभिभावक शिवनारायण चौहान ने कहा कि इस पहल से बच्चों के मन से पुलिस का डर हमेशा के लिए खत्म हो गया है और अब उनमें आगे बढ़ने का विश्वास जागा है। एसपी साईं कृष्णा थोटा के अनुसार, पारधी समाज अक्सर सही दिशा और अवसरों की कमी के कारण मुख्यधारा से कटा रहता था। ‘उड़ान’ पहल सिर्फ एक ट्रेनिंग कैंप नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और विश्वास निर्माण की एक ऐसी नींव है, जो इन परिवारों के भविष्य को एक नई और सकारात्मक दिशा देगी।

