Lifestyle Desk – भारतीय भोजन में पापड़ का अपना खास स्थान है. दाल-चावल, खिचड़ी या थाली के साथ परोसा जाने वाला पापड़ स्वादको कई गुना बढ़ा देता है. समय के साथ पापड़ की कई नई किस्में बाजार में उपलब्ध होने लगी हैं. इनमें लाल, हरे, पीले और नारंगी जैसे आकर्षक रंगों वाले पापड़ भी शामिल हैं, जो खासकरबच्चों और युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. हालांकि, देखने में आकर्षक लगने वाले ये रंगीन पापड़ हर बार स्वास्थ्य केलिए सुरक्षित हों, ऐसा जरूरी नहीं है. यदि इनमें इस्तेमाल किए गए रंग तय मानकों के अनुरूप न हों, तो यह शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं.

खाद्य पदार्थों में केवल स्वीकृत (फूड-ग्रेड) रंगों का ही सीमित मात्रा में उपयोग किया जाना चाहिए. लेकिन कई बार निर्माता पापड़ों को अधिक आकर्षक बनाने के लिए सस्ते और निम्न गुणवत्ता वाले रंगों का इस्तेमाल कर देते हैं. ऐसे रंग लंबे समय तक सेवन करने पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं. आइए जानते हैं इसके सेवन के नुमसान.
क्या हो सकते हैं नुकसान?
रंगीन पापड़ों में यदि निर्धारित मानकों से अधिक या गैर-स्वीकृत रंगों का उपयोग किया गया हो, तो कुछ लोगों में एलर्जी की समस्या हो सकती है. त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, आंखोंमें जलन या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. इसके अलावा, कुछ लोगों को पेट दर्द, गैस, अपच, मतली या दस्त जैसी पाचन संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं. बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी एलर्जी या पाचन संबंधी बीमारीसे जूझ रहे लोगों में ऐसे उत्पादों का असर अपेक्षाकृत अधिक होसकता है. इसलिए इनके खानपान में अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है.
खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
रंगीन पापड़ खरीदते समय हमेशा विश्वसनीय और प्रतिष्ठित ब्रांड का ही चुनाव करें. पैकेट पर निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, सामग्री (इंग्रेडिएंट्स) और इस्तेमाल किए गए खाद्य रंगों की जानकारी अवश्य पढ़ें. यदि पैकेट पर किसी प्रकार की जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई है या उत्पाद बिना लेबल के बिक रहा है, तो उसे खरीदने से बचें. बहुत अधिक चमकीले या अस्वाभाविक रंग वाले पापड़ों कोलेकर भी सतर्क रहना चाहिए. प्राकृतिक या मानक खाद्य रंग आमतौर पर हल्के और संतुलित दिखाई देते हैं, जबकि अत्यधिक चटक रंग गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर सकते हैं.
सीमित मात्रा में करें सेवन
पापड़ चाहे सादा हो या रंगीन, उसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करना बेहतर माना जाता है. अधिकांश पापड़ों में नमक कीमात्रा अधिक होती है और कई लोग इन्हें तलकर खाते हैं, जिससेअतिरिक्त तेल और कैलोरी शरीर में पहुंचती है. इसलिए भुने हुए पापड़ का विकल्प अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है.


