अभय मिश्रा, मऊगंज। डिजिटल इंडिया के इस दौर में आपने ऑनलाइन पेमेंट से सब्जी खरीदते, मॉल में शॉपिंग करते या बिल चुकाते तो हर किसी को देखा होगा। लेकिन मध्य प्रदेश के नवनिर्वाचित जिले मऊगंज से एक ऐसा हाईटेक और शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरे शिक्षा विभाग को हिलाकर रख दिया है। यहां एक रिटायर्ड शिक्षक को अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई और हक के एरियर भुगतान के लिए ‘डिजिटल रिश्वत’ देनी पड़ी। भ्रष्टाचार का यह पूरा खेल नगद में नहीं, बल्कि सीधे PhonePe के जरिए खेला गया।

BEO के बेटे के खाते में आई रिश्वत की रकम

मामला मऊगंज जिले के हनुमना ब्लॉक शिक्षा विभाग का है। आरोप है कि हनुमना के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) देवेंद्र मिश्रा ने एक रिटायर्ड शिक्षक जागेश्वर प्रसाद द्विवेदी के अर्जित अवकाशके एरियर भुगतान की फाइल को दबाकर रखा था। जब बुजुर्ग शिक्षक दफ्तर के चक्कर काट-काटकर थक गया, तो साहब ने फाइल आगे बढ़ाने के बदले 50,000 रुपये की मोटी घूस मांग ली।

कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए बीईओ देवेंद्र मिश्रा ने घूस की रकम खुद कैश में नहीं ली। उन्होंने डिजिटल इंडिया का फायदा उठाते हुए तीन किस्तों में यह रकम अपने सगे बेटे के बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करवा ली।

ऑडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट ने उड़ाई नींद

पीड़ित शिक्षक जागेश्वर प्रसाद द्विवेदी ने हिम्मत दिखाते हुए इस महा-भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पीड़ित शिक्षक ने हमारी टीम से संपर्क किया और वो तमाम सबूत, फोनपे ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट और ऑडियो रिकॉर्डिंग रख दिए हैं। जो इस घूसकांड की खुली गवाही दे रहे हैं। हद तो तब हो गई जब पीड़ित शिक्षक ने कैमरे पर यह भी कबूल किया कि उन्होंने विभाग के डर से दो अन्य लाचार शिक्षकों की रिश्वत भी बीआरसी (BRC) को दिलवाई थी।

बिना बिजली के स्कूलों में भी चला दिया ‘कागजी RO’

मऊगंज जनपद शिक्षा केंद्र में भ्रष्टाचार का यह कोई पहला मामला नहीं है। दागी बीईओ देवेंद्र मिश्रा का पुराना इतिहास भी विवादों और घोटालों से घिरा रहा है। जब देवेंद्र मिश्रा बीआरसी (BRC) के पद पर तैनात थे, तब सरकारी स्कूलों में बच्चों को साफ पानी देने के नाम पर एक बड़ा RO Filter घोटाला हुआ था।

भोपाल से घटिया सामग्री अधिक दामों पर खरीदी गई थी। रामकुडवा विद्यालय और देवरा हरिजन बस्ती के स्कूलों में धरातल पर कभी आरओ लगा ही नहीं, लेकिन कागजों पर बजट ठिकाने लगा दिया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि जिन स्कूलों में बिजली का कनेक्शन तक नहीं था, वहां भी साहब ने कागजों पर आरओ को ‘चालू हालत’ में दिखाकर सरकारी बजट डकार लिया था।

रसीद ऑनलाइन… तो कार्रवाई ऑफलाइन क्यों?

इस डिजिटल रिश्वतकांड के पुख्ता सबूत सामने आने के बाद भी प्रशासन की कार्रवाई ‘ऑफलाइन’ मोड में सो रही है। इससे पहले इसी दफ्तर के ब्लॉक स्रोत समन्वयक (BRC) शिवकुमार रजक को फोनपे पर पैसे लेने के आरोप में तत्काल पद से हटा दिया गया था, लेकिन बीईओ देवेंद्र मिश्रा पर अब तक मेहरबानी क्यों बरती जा रही है, यह बड़ा सवाल है। जब मीडिया टीम ने मऊगंज के वरिष्ठ अधिकारियों से इस डिजिटल घूसकांड पर जवाब मांगना चाहा, तो सभी ने कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से मना कर दिया और चुप्पी साध ली। अब देखना होगा कि प्रशासन इन पुख्ता डिजिटल सबूतों के आधार पर आरोपी अधिकारी पर कब तक और क्या कार्रवाई करता है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m