भागलपुर। जिले में कांग्रेस पार्टी द्वारा हाल ही में जारी की गई प्रखंड अध्यक्षों की सूची के बाद राजनीतिक गलियारों में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। पार्टी के कई नेताओं ने इस चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए संगठनात्मक संविधान के उल्लंघन का आरोप लगाया है। नेताओं ने पार्टी हाईकमान से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने, निष्पक्ष जांच करवाने और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
दागियों को जिम्मेदारी देने का गंभीर आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेता अभय कांत झा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पीरपैंती, बिहपुर और गोपालपुर प्रखंडों में जिन व्यक्तियों को अध्यक्ष पद की कमान सौंपी गई है, उनके ऊपर पहले से ही आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के संगठनात्मक नियमों के अनुसार, गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त और जिन पर आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं, ऐसे लोगों को कोई भी महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए। इस तरह के फैसलों से पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष और निराशा का माहौल है।
चयन प्रक्रिया में मनमानी और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा
विपिन बिहारी यादव ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन नियुक्तियों के दौरान स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं की राय और निर्णयों को पूरी तरह दरकिनार किया गया है। उनका कहना था कि पार्टी मुख्यालय द्वारा तय दिशा-निर्देशों और निर्धारित चुनावी प्रक्रिया के तहत ही संगठनात्मक चुनाव होने चाहिए थे, लेकिन भागलपुर में इन नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई गईं।
महिला प्रतिनिधित्व की अनदेखी पर रोष
महिला कांग्रेस की नगर अध्यक्ष आरती सिंह ने संगठन में महिलाओं की भागीदारी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस पार्टी लगातार महिलाओं को 50 प्रतिशत या पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की वकालत करती है, लेकिन भागलपुर जिले के एक भी प्रखंड में किसी भी महिला को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी नहीं दी गई। उन्होंने इसे महिला कार्यकर्ताओं की सीधी उपेक्षा करार देते हुए संगठन में उन्हें उचित हक देने की मांग उठाई।
संगठनात्मक ढांचे में अनाधिकृत बदलाव का दावा
कांग्रेस नेताओं ने यह भी सनसनीखेज आरोप लगाया कि भागलपुर विधानसभा क्षेत्र के संगठनात्मक ढांचे में पहले तीन प्रखंड हुआ करते थे, लेकिन हालिया सूची में एक नया ‘नगर निगम अध्यक्ष’ पद बना दिया गया है। नेताओं का तर्क है कि पार्टी संविधान के अनुसार इस तरह के बदलाव केवल सक्षम स्तर की आधिकारिक स्वीकृति के बाद ही संभव हैं। उन्होंने सूची जारी करने वाले व्यक्ति की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर किस अधिकार के तहत यह सूची जारी की गई, क्योंकि इसे जारी करने वाले के पास बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी या एआईसीसी का कोई आधिकारिक प्राधिकार नहीं था।
’बाहरी लोगों’ द्वारा पार्टी कमजोर करने की साजिश
नेताओं ने आरोप लगाया कि हाल ही में अन्य दलों से कांग्रेस में शामिल हुए कुछ लोग पार्टी पर हावी होने की कोशिश कर रहे हैं। वे पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रहे हैं, जो पार्टी की विचारधारा और संगठनात्मक अनुशासन के बिल्कुल विपरीत है।
हाईकमान से हस्तक्षेप की गुहार
प्रेस वार्ता के अंत में कांग्रेस नेताओं ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से अपील की है कि वे इस मामले का संज्ञान लें। उन्होंने पूरी नियुक्ति प्रक्रिया की उच्चस्तरीय समीक्षा करने और नियमों को ताक पर रखने वाले दोषियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, जिन नवनियुक्त अध्यक्षों पर आपराधिक मुकदमे का दावा किया गया है, उस पर पुलिस के आधिकारिक बयान और मौजूदा कानूनी स्थिति (जैसे चार्जशीट की स्थिति) के सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी।


