भारत मुक्ति मोर्चा ने हरियाणा में संदिग्ध एनकाउंटर की घटनाओं पर रोष प्रकट करते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने हाईकोर्ट के सिटिंग जज से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
अजय सैनी, भिवानी। कथित फर्जी एनकाउंटर की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए ‘भारत मुक्ति मोर्चा’ के नेतृत्व में विभिन्न सामाजिक संगठनों ने रविवार को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश दहिया की अगुवाई में स्थानीय बावड़ी गेट स्थित वाल्मीकि धर्मशाला में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसके बाद प्रशासन को ज्ञापन दिया गया। दहिया ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन न्यायपालिका के अधिकारों का अतिक्रमण कर रहा है और फर्जी एनकाउंटरों के माध्यम से संविधान द्वारा निर्धारित कार्यपालिका और न्यायपालिका की सीमाओं का उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने इन घटनाओं को लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बताया।
करनाल और सोनीपत की घटनाओं पर उठाए गंभीर सवाल
रमेश दहिया ने 26 अप्रैल को करनाल के गांव गोंदर निवासी गोविंद के साथ हुई घटना का प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने इसे एक सुनियोजित साजिश करार देते हुए कहा कि गोविंद ने एक कमेटी के माध्यम से पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था, लेकिन आत्मसमर्पण के कुछ ही घंटों बाद सीआईए-2 करनाल ने उसके पैर में गोली मार दी। इसके अलावा, उन्होंने सोनीपत में भी शक के आधार पर एक छात्र को गोली मारने की घटना की कड़ी निंदा की। दहिया ने तर्क दिया कि सजा तय करना और आरोप सिद्ध करना केवल न्यायालय का अधिकार क्षेत्र है, जिसमें पुलिस का इस प्रकार हस्तक्षेप करना पूरी तरह असंवैधानिक है।
हाईकोर्ट के जज से जांच और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
भारत मुक्ति मोर्चा और अन्य सहयोगी संगठनों ने राष्ट्रपति से मांग की है कि हरियाणा में हुए संदिग्ध एनकाउंटरों की जांच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सिटिंग जज से करवाई जाए। उन्होंने अपील की कि करनाल एसपी कार्यालय और संबंधित थानों की सीसीटीवी फुटेज व कॉल लोकेशन को तुरंत सुरक्षित किया जाए ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। संगठन ने संलिप्त अधिकारियों को बर्खास्त करने, करनाल एसपी का तबादला करने और सभी मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में करने की मांग उठाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बल का दुरुपयोग बंद नहीं हुआ, तो यह सामाजिक न्याय और संवैधानिक ढांचे के लिए घातक सिद्ध होगा।
सामाजिक संगठनों की एकजुटता और चेतावनी
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान बामसेफ, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा और अन्य नागरिक संगठनों के प्रतिनिधि भी भारी संख्या में मौजूद रहे। रमेश दहिया ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यह मामला अनुसूचित जाति के उत्पीड़न से भी जुड़ा है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में दीपक जांगड़ा, कृष्ण बलियाली, जगदीश प्रधान, धर्मबीर अंबेडकर और मनीषा बिरला सहित कई नेताओं ने एक स्वर में कहा कि वे इस लड़ाई को कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर लड़ेंगे। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

