पटना। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज शुक्रवार को उस समय भारी भीड़ देखी गई, जब ‘क्रांतिवीर भरत तिवारी संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले एक विशाल न्याय अधिकार सभा का आयोजन किया गया। भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में इंसाफ की गुहार लगाने के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों से करीब 12,000 लोग एकत्रित हुए।
न्याय की गूंज और एकजुटता
कार्यक्रम की शुरुआत हम वतन साथियों गीत के साथ हुई जिसने सभा में मौजूद लोगों में जोश भर दिया। प्रदर्शनकारियों का मुख्य उद्देश्य इस मामले को राष्ट्रीय पटल पर लाना और प्रशासन पर दबाव बनाना है। सभा में आए समर्थकों का मानना है कि भरत तिवारी के साथ जो हुआ वह एक गंभीर घटना है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए।
30 दिन बाद भी नहीं मिला इंसाफ
एनकाउंटर के आज ठीक एक महीने पूरे हो गए हैं। इस मौके पर भावुक मां आशा देवी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस वादे की याद दिलाई जिसमें कहा गया था कि हर शिकायत का समाधान 30 दिनों के भीतर होगा।
आशा देवी ने सवाल उठाते हुए कहा मेरे बेटे के फर्जी एनकाउंटर को 30 दिन बीत चुके हैं लेकिन अब तक न्याय नहीं मिला। क्या मैं बिहार की नागरिक नहीं हूं? उन्होंने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि सरकारी दावे और जमीनी हकीकत में भारी अंतर है।
आगे की रणनीति और राष्ट्रपति को ज्ञापन
सभा के अंतिम चरण में आंदोलन को और तेज करने के लिए नई रणनीति तैयार की गई है। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिल जाता। इस पूरे घटनाक्रम के बाद, वकीलों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपने के लिए रवाना होगा। यह ज्ञापन न केवल घटना की सीबीआई जांच या उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग को दोहराएगा, बल्कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा और मुआवजे की भी बात रखेगा।
जंतर-मंतर पर जुटी यह भीड़ बताती है कि भरत तिवारी का मामला अब केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि एक बड़ा जन-आंदोलन बनता जा रहा है।

