अजय सैनी, भिवानी। अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर हरियाणा के भिवानी जिले में बाल श्रम के खिलाफ एक बड़ी और प्रभावी कार्रवाई देखने को मिली है। बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने एक विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण के निर्देशानुसार और समिति के चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर के नेतृत्व में जिले भर में सघन चेकिंग की गई। इस दौरान टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए तीन मासूम बच्चों को बाल मजदूरी के चंगुल से सकुशल मुक्त कराया।
प्रशासनिक टीम ने जाल बिछाकर चलाया रेस्क्यू अभियान
बाल मजदूरी की सूचना मिलने पर सीडब्ल्यूसी और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने शहर के विभिन्न इलाकों में औचक निरीक्षण किया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन को सफल बनाने में क्राइम ब्रांच के एएसआई मंजीता, एएसआई पवन, एएसआई रामफल के साथ-साथ सीडब्ल्यूसी सदस्य सतेंद्र तंवर, नीलम रानी, दिनेश अत्री, लक्ष्मी भारद्वाज और डीसीपीओ कार्यालय से सोशल वर्कर रिंकू ने विशेष भूमिका निभाई। टीम को देखकर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में हड़कंप मच गया। मुक्त कराए गए बच्चों को संरक्षण में लेकर उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बच्चे देश का भविष्य, सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: प्रदीप तंवर
इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिला बाल कल्याण समिति के चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर ने कहा कि बच्चे किसी भी देश का वास्तविक भविष्य और उसकी नींव होते हैं। उनके कोमल हाथों में काम का बोझ या औजार नहीं, बल्कि किताबें और खिलौने होने चाहिए। इन मासूमों को सुरक्षित माहौल, शिक्षा और उनके अधिकार दिलाना ही सीडब्ल्यूसी की सबसे पहली प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल श्रम एक सामाजिक अभिशाप है, जिसे केवल कानून के भरोसे नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जागरूकता से ही जड़ से मिटाया जा सकता है।
नियोक्ताओं के खिलाफ होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
चेयरमैन ने बताया कि जिन स्थानों पर इन मासूम बच्चों से जबरन मजदूरी कराई जा रही थी, उन दुकानदारों और नियोक्ताओं के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हर बच्चे को भयमुक्त और गरिमापूर्ण बचपन जीने का अधिकार है। उन्होंने आम जनता से भी अपील की है कि यदि किसी भी दुकान, होटल, कारखाने या घरों में कोई छोटा बच्चा मजदूरी करता हुआ दिखाई दे, तो तुरंत इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन या सीडब्ल्यूसी को दें ताकि मासूमों का भविष्य बचाया जा सके।

