भिवानी शहर में जनसंख्या के अनुपात में पेयजल व्यवस्था अपग्रेड न होने से हाहाकार मचा है। महम रोड और निनाण जलघर के टैंक खाली होने से स्थिति बेहद गंभीर हो गई है।

अजय सैनी, भिवानी। प्रदेश के भिवानी शहर में भीषण गर्मी के बीच पेयजल का गंभीर संकट गहरा गया है। साल 2019 से चली आ रही यह समस्या अब विकराल रूप ले चुकी है, जिसके कारण शहर के विभिन्न हिस्सों में आए दिन मटका फोड़ प्रदर्शन और सड़कों पर जाम देखने को मिल रहा है। स्थिति यह है कि 5 मई से महम रोड स्थित जलघर और निनाण जलघर के टैंक पूरी तरह सूख गए हैं, जिससे इनसे जुड़े क्षेत्रों में जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जनसंख्या के अनुपात में योजनाओं का विस्तार न होने और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण आज शहर की जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है।

पुरानी व्यवस्था और बूस्टिंग स्टेशनों की बदहाली

भिवानी की इस बदहाली का मुख्य कारण समय रहते पेयजल व्यवस्था का अपग्रेड न होना है। शहर के मिताथल हेड पर स्थित जनस्वास्थ्य विभाग का बूस्टिंग स्टेशन वर्तमान मांग को पूरा करने में अक्षम साबित हो रहा है। यहाँ वर्तमान में केवल 4 मोटरें लगी हैं, जिनमें से एक खराब है, जबकि बढ़ती आबादी को देखते हुए यहाँ कम से कम 12 से 15 भारी-भरकम मोटरों की आवश्यकता है। गौरतलब है कि ये मोटरें साल 2013 में तत्कालीन जनस्वास्थ्य मंत्री किरण चौधरी के कार्यकाल में लगाई गई थीं, जिसके बाद से इस सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बिजली कटौती और जनरेटरों की सीमित क्षमता ने इस संकट को और अधिक गहरा दिया है।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका और भविष्य की राह

विपक्ष और जनता का सवाल है कि जब हिसार, जींद और रोहतक जैसे पड़ोसी शहरों में जनसंख्या के हिसाब से सिस्टम अपग्रेड हुआ, तो भिवानी के रहनुमा क्यों गहरी नींद सोए रहे? हालांकि, वर्तमान सिंचाई मंत्री, जो स्वयं भिवानी से हैं, उनके प्रयासों से 7 मई को जूई नहर में पानी छोड़ा गया है, लेकिन नहरों के जर्जर चैनल के कारण 600 क्यूसिक के बजाय केवल 462 क्यूसिक पानी ही छोड़ा जा सका। राहत की बात यह है कि राज्य सरकार ने पेयजल व्यवस्था में सुधार के लिए 222 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। अब देखना यह होगा कि यह बजट धरातल पर बदलाव लाता है या फिर विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ जाता है।

नहरों की क्षमता और जलघरों का विस्तार जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भिवानी के पेयजल संकट को स्थायी रूप से समाप्त करना है, तो केवल बजट जारी करना काफी नहीं होगा। इसके लिए नहरों के चैनलों की मरम्मत, जलघरों की भंडारण क्षमता में वृद्धि और मिताथल हेड जैसे महत्वपूर्ण बूस्टिंग स्टेशनों पर आधुनिक पंपिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। वर्तमान में 16 दिन नहर चलने के बावजूद महम रोड और निनाण जलघर के टैंक केवल 60 प्रतिशत ही भर पाएंगे, जो अगले लंबे अंतराल के लिए पर्याप्त नहीं होंगे। विभाग को चाहिए कि वह रसोइयों और कंठ की प्यास बुझाने के लिए युद्ध स्तर पर तकनीकी सुधार सुनिश्चित करे।