भिवानी के बीरण गांव में पिछले दो महीनों से जारी भयंकर बिजली संकट के खिलाफ ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। नाराज लोगों ने स्थानीय सांसद और विधायक के घरों का घेराव कर चेतावनी दी।
भिवानी। जिले के अंतर्गत आने वाले बीरण गांव में सोमवार को भयंकर बिजली संकट से नाराज सैकड़ों ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सरकार की ‘जगमग योजना’ के चौबीस घंटे बिजली देने के दावों की जमीनी हकीकत को उजागर करते हुए ग्रामीणों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। पिछले करीब दो महीनों से भीषण और तपती गर्मी के बीच बिजली कटौती से परेशान लोगों ने भिवानी पहुंचकर स्थानीय सांसद धर्मबीर सिंह और क्षेत्रीय विधायक के सरकारी आवासों का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि बिजली विभाग की घोर लापरवाही और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की बेरुखी के कारण पूरा क्षेत्र इस समय त्रस्त है।
भीषण गर्मी में गहराया पेयजल और पढ़ाई का संकट
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सरपंच प्रतिनिधि जोगेंद्र सिंह फौगाट ने प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बताया कि इस जानलेवा गर्मी में बिजली विभाग कभी ओवरलोड तो कभी तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर लगातार कटौती कर रहा है। अधिकारी स्थायी समाधान करने की बजाय केवल खोखले आश्वासन दे रहे हैं, जिससे पूरे गांव में पेयजल का भारी संकट खड़ा हो गया है और बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो चुकी है। दरअसल, बीती 3 मई को आए तेज तूफान की वजह से गांव में बिजली के 14 पोल धराशायी हो गए थे, जिन्हें प्रशासन ने अब तक दुरुस्त नहीं किया है।
तीन दिन का अल्टीमेटम और लंबित फसल मुआवजा
बीरण गांव में करीब 1400 घरों की 6 हजार की आबादी इस समस्या के कारण नरकीय जीवन जीने को मजबूर है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले तीन दिनों के भीतर इसका स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो वे महापंचायत बुलाकर बड़ा आंदोलन करेंगे। इसके साथ ही ग्रामीणों ने पिछले वर्ष जलभराव से बर्बाद हुई फसलों के आधे-अधूरे मुआवजे पर भी रोष जताया। दूसरी तरफ, सांसद धर्मबीर सिंह ने बताया कि चक्रवाती तूफान के कारण सर्कल में दो हजार खंभे टूटे थे और प्रदेश में बिजली की मांग 11,500 से बढ़कर रिकॉर्ड 14,500 मेगावाट पहुंच गई है, जिसे जल्द ही दुरुस्त कर लिया जाएगा।

