अजय सैनी, भिवानी. दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुए घटनाक्रम के विरोध में तथा छात्र-छात्राओं के सम्मान, सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर पूर्व छात्र नेता एवं समाजसेवी उमेश भारद्वाज तथा छात्र नेता मंजीत लांगयान द्वारा शुरू की गई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का शुक्रवार को जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद समापन हुआ।

उपायुक्त के निर्देश पर सीटीएम भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से बातचीत की, उनकी मांगों और ज्ञापन को गंभीरता से सुना तथा आश्वासन दिया कि जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े छात्रों की न्यायोचित मांगों और भावनाओं को संबंधित सरकार एवं सक्षम अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।

प्रशासन के आग्रह और सकारात्मक पहल के बाद सीटीएम ने उमेश भारद्वाज एवं मंजीत लांगयान को जूस पिलाकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करवाई।

भूख हड़ताल समाप्त करने से पहले दोनों आंदोलनकारियों ने अपने रक्त से इंकलाब जि़ंदाबाद लिखकर यह संदेश दिया कि यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि छात्रों के सम्मान, न्याय और अधिकारों के लिए उनके अटूट संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भूख हड़ताल समाप्त हुई है, लेकिन संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है।

पूर्व छात्र नेता एवं समाजसेवी उमेश भारद्वाज ने कहा कि जंतर-मंतर पर देशभर से पहुंचे छात्र-छात्राओं ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ उठाई थी। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के भविष्य और सम्मान से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद सबसे बड़ा माध्यम होता है और छात्रों की आवाज़ को संवेदनशीलता के साथ सुनना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन भाजपा सरकार विद्यार्थियों की आवाज को सुनने की बजाए उसे लाठियों के जोर पर दबाने का प्रयास कर रही है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने मांग की कि विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले केंद्रीय शिक्षा मंत्री को तुरंत पद से इस्तीफा देना चाहिए। छात्र नेता मंजीत लांगयान ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल या संगठन का नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक विद्यार्थी के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य का आंदोलन है। उन्होंने कहा कि हमारी भूख हड़ताल आज समाप्त हुई है, लेकिन छात्रों के लिए हमारा संघर्ष मरते दम तक जारी रहेगा। जब तक प्रत्येक विद्यार्थी को सम्मान, सुरक्षित वातावरण, न्याय और बेहतर शिक्षा व्यवस्था नहीं मिलेगी, तब तक हम संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप अपनी आवाज़ बुलंद करते रहेंगे।

दोनों नेताओं ने कहा कि जंतर-मंतर का आंदोलन देशभर के छात्रों की एकता और लोकतांत्रिक चेतना का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छात्रों के न्यायपूर्ण मुद्दों पर सरकार सकारात्मक निर्णय लेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में भी छात्रों के अधिकारों और सम्मान की अनदेखी की गई तो लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष को आगे बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं से शिक्षा, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया तथा कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के बेहतर भविष्य के लिए है।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री वासुदेव शर्मा, पूर्व बार प्रधान सत्यजीत पिलानिया, कमल प्रधान, कॉमरेड ओमप्रकाश, रघुबीर रंगा, एडवोकेट दीपेश सारसर, प्रिया लेघा, ज्योति भारद्वाज, इंदु परमार, अशोक आर्य, निर्मला परमार, सचिन जताई, मास्टर रामफल, कृष्ण जिला प्रधान, सीताराम नंबरदार, संदीप लोहानी, इरफान, इमरान, मनु, शिवा, शिवा परमार, आर.के. सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, छात्र-छात्राएं, विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, युवा एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने आंदोलनकारियों का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों के सम्मान, सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा लोकतंत्र की मूल भावना है।


अंत में उमेश भारद्वाज एवं मंजीत लांगयान ने जिला प्रशासन, अधिवक्ताओं, छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों, मीडिया तथा सभी समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का समापन प्रशासन के आग्रह पर किया गया है, लेकिन छात्रों के सम्मान, न्याय, सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई पहले से अधिक मजबूती के साथ आगे भी निरंतर जारी रहेग.