अजय सैनी, भिवानी। जिले के कस्बा बवानीखेड़ा में रविवार को आयोजित मुख्यमंत्री की रैली से ठीक पहले पुलिस ने छात्र नेता प्रवीण बूरा को उनके घर से हिरासत में ले लिया। प्रवीण बूरा और उनके साथी छात्र विभिन्न समस्याओं व मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपने वाले थे। रैली स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस सवेरे ही उनके आवास पर पहुंची और उन्हें हिरासत में ले लिया, जिससे क्षेत्र के युवाओं और छात्र संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापन सौंपने की थी योजना

प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्र नेता प्रवीण बूरा और उनके साथियों ने रविवार को मुख्यमंत्री की रैली के दौरान शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात सीएम तक पहुंचाने की योजना बनाई थी। इसके लिए पूरी तैयारी भी की गई थी। हालांकि, कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही पुलिस टीम ने उनके घर पहुंचकर उन्हें हिरासत में ले लिया ताकि वे रैली में न पहुंच सकें।

“युवाओं की बुलंद आवाज से डरी सरकार”: प्रवीण बूरा

अपनी हिरासत के बाद छात्र नेता प्रवीण बूरा ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्र नेताओं और युवाओं की बुलंद होती आवाज से बुरी तरह डर गई है। सरकार को लगता है कि अकारण गिरफ्तारियों से युवाओं को डराया जा सकता है, लेकिन युवा डरने या झुकने वाले नहीं हैं।

लोकतांत्रिक अधिकार दबाने का आरोप

प्रवीण बूरा ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपना उनका लोकतांत्रिक अधिकार था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार चाहे जितनी पुलिस लाठियां या गिरफ्तारियां इस्तेमाल कर ले, छात्रों और युवाओं की जायज आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने छात्र अधिकारों के लिए अपनी लड़ाई इसी तरह जारी रखने का संकल्प जताया।

छात्र संगठनों और युवाओं में फैला गुस्सा

घटना के बाद क्षेत्र के युवाओं और छात्र संगठनों में रोष है। छात्रों का कहना है कि अपनी मांगों के सिलसिले में ज्ञापन सौंपना कोई अपराध नहीं है। सुबह-सुबह इस तरह घर से उठाना पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। युवाओं का आरोप है कि यह घटनाक्रम साबित करता है कि सरकार युवाओं के वास्तविक मुद्दों को सुनने के बजाय प्रशासनिक बल का प्रयोग कर रही है।

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