संजय पाटीदार, भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गणपति बप्पा घर-घर विराजमान हो चुके हैं, लेकिन जिस नगर निगम को विसर्जन की तैयारी पहले से करनी थी वो अब जाकर घाटों का जायजा ले रहा है। सवाल ये है कि जब बजट पास हुए महीनों बीत गए तो घाट अधूरे क्यों हैं ? शहर के हर मोहल्ले में बप्पा विराजमान हो चुके हैं, लेकिन नगर निगम की नींद अब खुली है। खुद महापौर मालती राय घाटों के निरीक्षण पर निकलीं, वो घाट जिनके लिए महीनों पहले करोड़ों का बजट पास हुआ था।

भोपाल में स्थायी गणेश विसर्जन व्यवस्था के लिए करीब 25 करोड़ 8 लाख से ज्यादा रुपये का प्रस्ताव पास हुआ था। जुलाई 2025 में नगर निगम ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, नीलबड़, संजीव नगर, मालीखेड़ी और प्रेमपुरा में विसर्जन कुंड और विकास कार्य कराने की योजना बनाई थी। दावा था कि शहर की चारों दिशाओं में स्थायी विसर्जन घाट तैयार होंगे, लेकिन जुलाई 2025 से सितंबर 2026 तक करीब 14 महीने बीतने के बाद भी योजना पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर सकी।

ये भी पढ़ें: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जगमगाया मध्यप्रदेश, शिप्रा तट-महाकाल महालोक में एक साथ जलाए गए 33.27 लाख दीये, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

पर्यावरणविदों ने जताई चिंता

पांच जगहों पर प्रस्तावित कामों में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के लिए 4.45 करोड़, नीलबड़ के लिए 6.01 करोड़, संजीव नगर के लिए 4.77 करोड़, मालीखेड़ी के लिए 2.49 करोड़ और प्रेमपुरा के लिए 7.34 करोड़ रुपये का प्रावधान था। पिछले साल की तरह इस बार भी गणेश विसर्जन के लिए पुराने घाटों पर ही बप्पा विसर्जित होंगे। ऐसे में सवाल है कि करोड़ों की स्थायी योजना के बावजूद नए घाटों का इंतजार आखिर कब खत्म होगा। पर्यावरणविदों ने भी इस पर चिंता जताई है।

पर्यावरणविद् सुभाष सी. पाण्डेय ने कहा कि जलस्रोतों में मूर्ति विसर्जन से पानी प्रदूषित होने के साथ जलीय जीवों को भी नुकसान पहुंचता है। आसपास के भूजल पर भी इसका असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि भोपाल जैसे 25 से 28 लाख आबादी वाले शहर में कम से कम 40 से 50 अलग विसर्जन कुंड होने चाहिए। इस बार भी मूर्तियां विसर्जन के लिए पुराने घाटों पर ही व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सुभाष सी. पाण्डेय के मुताबिक, राष्ट्रीय हरित अधिकरण और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार मूर्ति विसर्जन पीने के पानी के जलस्रोतों में सीधे नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए अलग कुंड बनाए जाने चाहिए। कुंड में सिंथेटिक लाइनर बिछाने की व्यवस्था हो, ताकि विसर्जन के बाद मूर्ति के अवशेष बाहर निकालकर उचित तरीके से निपटाए जा सकें।

ये भी पढ़ें: श्योपुर में आस्था के साथ खिलवाड़: जूते पहनकर आरती करते दिखे नगरीय प्रशासन आयुक्त, Video वायरल

मेयर मालती राय ने कही ये बात

उन्होंने कहा कि मूर्तियों में पीओपी के इस्तेमाल से बचना चाहिए और रासायनिक रंग व डाइज का उपयोग नहीं होना चाहिए। विसर्जन से पहले मूर्ति से आभूषण और वस्त्र निकालने चाहिए। उनके मुताबिक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2020 की गाइडलाइन के बावजूद स्थानीय स्तर पर इन व्यवस्थाओं का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। इसके पीछे महापौर मालती राय ने कहा कि छोटी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए शहर में करीब 25 से 30 अस्थायी घाट बनाए जाएंगे, जबकि बड़ी प्रतिमाओं का विसर्जन सातों स्थायी घाटों पर होगा। स्थायी घाटों में मालीखेड़ी का घाट बनकर तैयार है, जबकि नीलबड़ घाट का प्रोजेक्ट बड़ा होने के कारण उसका काम फिलहाल रुका हुआ है।

कांग्रेस ने विसर्जन घाट को लेकर उठाए सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने कमीशन, करप्शन और कर्ज वाली सरकार बताया। उन्होंने कहा कि गणेश विसर्जन के लिए करोड़ों का बजट स्वीकृत हुआ, वो कहां गया किसी को दिखाई नहीं दे रहा है। विकास के नाम पर स्वीकृत पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। करोड़ों के बजट के बावजूद अधूरे विसर्जन घाटों ने नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गणपति विसर्जन का समय आ गया लेकिन स्थायी व्यवस्था अब भी अधूरी है। इस बार भी शहर को पुराने घाटों और अस्थायी इंतजामों के भरोसे रहना पड़ेगा। सवाल यही है कि जब बजट और योजना पहले ही तैयार थी तो जमीन पर काम पूरा होने में इतनी देरी क्यों हुई ? आखिर भोपाल को स्थायी विसर्जन घाटों के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा?

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m