संजय पाटीदार, भोपाल। ऐशबाग के 90 डिग्री ओवरब्रिज के बाद अब भोपाल में सौंदर्यीकरण का एक और मॉडल विवादों में है। पीएंडटी चौराहे पर पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए बने फुटपाथ को लोहे की रेलिंग से घेर दिया गया है, जिससे राहगीरों के लिए फुटपाथ तक पहुंचना ही चुनौती बन गया है।
नगर निगम भोपाल ने राजधानी के वार्ड-32 स्थित पीएंडटी चौराहे पर सौंदर्यीकरण ओर विकास के नाम पर फुटपाथ के चारों ओर लोहे की रेलिंग लगाई गई है। जिससे पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस फुटपाथ का निर्माण राहगीरों की सुविधा के लिए किया गया था, वही अब उनके लिए बेकार साबित हो रहा है। करीब तीन फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग के कारण लोग सीधे फुटपाथ पर चढ़ नहीं पा रहे हैं। कई जगहों पर एक तरफ रेलिंग और दूसरी ओर पहले से बनी पक्की दीवार होने से फुटपाथ पूरी तरह घिर गया है।
सबसे ज्यादा परेशानी बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन से उतरने वाले यात्रियों को हो रही है।रहवासियों ने इस निर्माण को सुविधा के बजाय असुविधा का कारण बताते हुए कह रहे हैं कि कि बिना जमीनी जरूरतों का आकलन किए ऐसे डिजाइनों को मंजूरी कैसे दी जा रही है। उनका कहना है कि यह सरकारी धन की बर्बादी का उदाहरण है।
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री एनके डेहरिया ने मीडिया से कहा कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में फुटपाथ के उपयोग पर असर पड़ना पाया गया तो आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। उन्होंने मौके का निरीक्षण करने की भी बात कही है।
नियमों के अनुसार फुटपाथ तक पहुंच आसान और बाधारहित होनी चाहिए। शहरी मानकों में रिहायशी क्षेत्रों में फुटपाथ की न्यूनतम चौड़ाई 1.8 मीटर और व्यावसायिक क्षेत्रों में 2.5 मीटर निर्धारित है। ऐसे में पीएंडटी चौराहे पर बनाया गया यह मॉडल अब सवालों के घेरे में आ गया है।

