शब्बीर अहमद, Bhopal. राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल से एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जिसे सुनकर चिकित्सा जगत के बड़े-बड़े दिग्गजों ने भी दांतों तले उंगलियां दबा ली है। अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के डॉक्टरों ने मौत के मुंह में फंसी एक गर्भवती महिला का ऐसा जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन किया है जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। डॉक्टरों की टीम ने महिला के गर्भ से न सिर्फ एक स्वस्थ बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला बल्कि उसी के साथ महिला की ओवरी से 10.2 किलोग्राम वजन का एक विशालकाय ट्यूमर भी निकालकर इतिहास रच दिया है।
जा सोचिए एक तरफ गर्भ पल रहा नन्हा शिशु और दूसरी तरफ पहाड़ जैसा भारी-भरकम जानलेवा ट्यूमर! इस बेहद खतरनाक स्थिति के बावजूद डॉक्टरों की सूझबूझ से आज मां और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं।
मौत को मात: 10 किलो का ट्यूमर और स्वस्थ बच्चा!
यह पूरा ऑपरेशन किसी बड़ी अग्निपरीक्षा जैसा था। महिला जब अस्पताल पहुंची तो उसकी स्थिति अत्यंत नाजुक थी। डॉक्टरों के सामने दोहरी चुनौती थी- पहली चुनौती 2.6 किलोग्राम वजन के मासूम शिशु को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित दुनिया में लाना था और दूसरी चुनौती उसी समय महिला के शरीर से उस भारी-भरकम ट्यूमर को काटना था जो लगातार महिला की जान सोख रहा था।
एक ही शल्य चिकित्सा में दो बड़े काम: सीनियर सर्जनों ने बिना एक पल गंवाए सिजेरियन ऑपरेशन शुरू किया। डॉक्टरों ने पहले कुशलता से 2.6 किलोग्राम के स्वस्थ बच्चे का जन्म कराया।
निकाला ‘विशालकाय’ ट्यूमर: बच्चा सुरक्षित होने के तुरंत बाद, डॉक्टरों ने उसी ऑपरेशन के दौरान महिला की ओवरी में फैले 10.2 किलोग्राम के उस विशाल ट्यूमर को भी सफलतापूर्वक काटकर शरीर से अलग कर दिया। ऑपरेशन के बाद जब ट्यूमर का वजन किया गया तो उसका आकार देखकर खुद अस्पताल का स्टाफ दंग रह गया।
चमत्कार करने वाले ‘भगवान के रूप’ डॉक्टर
इस नामुमकिन को मुमकिन बनाने का पूरा श्रेय हमीदिया अस्पताल के अनुभवी और जांबाज डॉक्टरों की टीम को जाता है।
कुशल नेतृत्व: यह बेहद जटिल ऑपरेशन सीनियर सर्जन डॉ. पल्लवी सिंह एवं डॉ. अदिति खरे के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
एनेस्थीसिया टीम की सूझबूझ: ऐसे नाजुक केस में मरीज को बेहोश रखना और गंभीर स्थिति को संभालना सबसे मुश्किल काम था, जिसे एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. तृप्ति वत्सल्य, डॉ. जितेन्द्र कुमार एवं डॉ. देवांशु सराफ ने अपनी सूझबूझ से बेहद आसान बना दिया।
जूनियर डॉक्टर्स का साथ: विभाग के जूनियर रेजिडेंट चिकित्सकों ने भी इस मैराथन ऑपरेशन में अपनी पूरी ताकत झोंक दी और टीमवर्क की बदौलत एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ने से बचा लिया।
जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार इस रोंगटे खड़े कर देने वाले सफल ऑपरेशन के बाद अब जच्चा और बच्चा (मां और नवजात शिशु) दोनों की स्थिति पूरी तरह स्थिर, संतोषजनक और खतरे से बाहर है। हमीदिया के डॉक्टरों की इस अविश्वसनीय सफलता की पूरे प्रदेश में जमकर तारीफ हो रही है!

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