हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ 2013 के बहुचर्चित इंडस्ट्रियल प्लॉट आवंटन मामले में CBI को केस चलाने की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है, जिससे राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। साल 2013 के बहुचर्चित पंचकूला इंडस्ट्रियल प्लॉट आवंटन घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। यह मामला 14 औद्योगिक भूखंडों के आवंटन में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। जाँच एजेंसी के इस कदम के बाद हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है, क्योंकि हुड्डा राज्य की राजनीति के केंद्र में रहने वाले बड़े चेहरों में से एक हैं।

नियमों की अनदेखी और करोड़ों का राजस्व घाटा

जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा विवाद पंचकूला में आवंटित 14 इंडस्ट्रियल प्लॉट्स की कीमतों और उनकी चयन प्रक्रिया से संबंधित है। आरोप है कि उस समय मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए हुड्डा ने नियमों में कथित तौर पर बदलाव किए, ताकि उनके करीबियों और चहेतों को लाभ पहुँचाया जा सके। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिन प्लॉट्स की बाजार कीमत लगभग 30 करोड़ रुपये थी, उन्हें नियमों को ताक पर रखकर मात्र 7 करोड़ रुपये में आवंटित कर दिया गया। इस प्रक्रिया में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA) के कुछ तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिन्होंने कथित तौर पर इस आर्थिक नुकसान में सहयोग किया।

सियासी गरमाहट और आगामी कानूनी प्रक्रिया

CBI को मुकदमा चलाने की अनुमति मिलने के बाद अब इस केस में कानूनी कार्यवाही की रफ्तार तेज होना तय माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, जाँच एजेंसी जल्द ही अदालत में इस मामले से जुड़े नए तथ्य और साक्ष्य पेश कर सकती है। वहीं दूसरी ओर, इस घटनाक्रम ने हरियाणा की सियासत को पूरी तरह से गरमा दिया है। जहाँ सत्ता पक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति बता रहा है, वहीं विपक्षी खेमे में इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बन रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाले खुलासे न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण साबित होंगे।