पटना। बिहार में समेकित बाल विकास सेवाओं (ICDS) के तहत संचालित केंद्र प्रायोजित योजनाओं में बड़ा बदलाव किया गया है। अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धातृ माताओं को सूखे राशन के स्थान पर रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट प्रीमिक्स फूड पैकेट उपलब्ध कराने की पूरी तैयारी कर ली गई है। मंत्रिपरिषद की मुहर लगने के बाद ICDS के संयुक्त सचिव द्वारा इस संबंध में आधिकारिक संकल्प भी जारी कर दिया गया है।

​पोषण सुधार और पारदर्शिता बढ़ाना है मुख्य उद्देश्य

​इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धातृ माताओं के पोषण एवं स्वास्थ्य स्तर में सकारात्मक सुधार लाना है। इसके साथ ही बाल मृत्यु दर में कमी लाने और बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस कदम से पूरक पोषाहार योजना के अंतर्गत दिए जाने वाले टेक होम राशन (THR) के वितरण के तरीकों में ऐतिहासिक बदलाव आएगा।

​काम्फेड के जरिए होगी गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्रियों की आपूर्ति

​भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (काम्फेड) के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित लाभार्थियों की सटीक संख्या के अनुसार प्रीमिक्स सामग्री पहुंचाई जाएगी।

​इन फूड पैकेटों में कई तरह के पौष्टिक विकल्प शामिल किए गए हैं, जैसे कि:

  • ​न्यूट्री राइस
  • ​खिचड़ी प्रीमिक्स
  • ​न्यूट्री पुलाव
  • ​फोर्टिफाइड मूंग दाल-चावल खिचड़ी
  • ​मल्टीमिक्स अनाज
  • ​नमकीन दलिया

​इन पैकेटों की आपूर्ति सीधे बाल विकास परियोजना कार्यालयों के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों तक सुनिश्चित की जाएगी।

​नकद राशि के लेनदेन पर रोक और अनियमितताओं का अंत

​अब तक पूरक पोषाहार योजना के तहत टेक होम राशन और पके भोजन की व्यवस्था के लिए आंगनबाड़ी विकास समिति के बैंक खातों में सीधे नकद राशि भेजी जाती थी। इस पुरानी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की तमाम शिकायतें मिल रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नकद लेनदेन को बंद कर सीधे फूड पैकेट उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, जिससे वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और सही लाभार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण पोषण पहुंच सकेगा।

​अधिकारियों के आदेश का इंतजार और कर्मियों की प्रतिक्रिया

​डुमरांव की सीडीपीओ शबाना कसवी ने इस बात की पुष्टि की है कि मंत्रिपरिषद की स्वीकृति मिलने के बाद विभागीय संकल्प जारी हो चुका है। हालांकि, लाभार्थियों को इन फूड पैकेटों की भौतिक आपूर्ति किस महीने से शुरू होगी, इसे लेकर अभी तक विभाग से अंतिम दिशा-निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।
​दूसरी ओर, आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन की जिला सचिव लीलावती देवी ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग उठाई है कि अन्य राज्यों की तर्ज पर बिहार में भी आंगनबाड़ी सेविकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी की जाए और उनका भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए।