पटना। बिहार की राजनीति में पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अपना कब्जा जमाने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी बड़े ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी में है। पार्टी का लक्ष्य अब सत्ता के साथ-साथ संगठन को पूरी तरह रिफ्रेश करना है। मई के शुरुआती पखवाड़े में सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर नई नियुक्तियों और चेहरों की घोषणा हो सकती है।
सत्ता का नया समीकरण: 30% मंत्रियों की होगी छुट्टी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जल्द ही अपनी पहली कैबिनेट का विस्तार करेंगे। सूत्रों की मानें तो भाजपा कोटे के मंत्रियों में कम से कम 30% चेहरों को बदला जा सकता है। पार्टी का स्पष्ट संदेश है परफॉर्म करो या पद छोड़ो।
- खाली पद: सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री और नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनके विभाग नए चेहरों को मिलेंगे।
- नॉन-परफॉर्मिंग पर गाज: दो से तीन ऐसे मंत्रियों की छुट्टी तय मानी जा रही है जिनका रिपोर्ट कार्ड उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
- युवाओं को प्राथमिकता: कैबिनेट की औसत आयु वर्तमान में 53 वर्ष है, जिसे और कम करने की योजना है। श्रेयसी सिंह और लखेंद्र पासवान जैसे युवा चेहरों के बाद अब कुछ और नए नाम रेस में हैं।
संगठन में ‘सफाई’ अभियान: 60% नए चेहरे
प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी संगठन विस्तार के जरिए पार्टी की मशीनरी को धार देने वाले हैं।
- महामंत्री पद पर बदलाव: शिवेश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद संगठन के सबसे महत्वपूर्ण पद ‘महामंत्री’ में बड़े बदलाव होंगे।
- उपाध्यक्षों की विदाई: लगभग 6-7 पुराने उपाध्यक्षों को हटाया जा सकता है, जबकि कुछ सक्रिय नेताओं को पदोन्नति मिलेगी।
- सोशल इंजीनियरिंग: नई टीम में पिछड़ा वर्ग (OBC), अति पिछड़ा (EBC) और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। वर्तमान में 35 सदस्यीय टीम में सवर्णों का दबदबा है, जिसे संतुलित करने की योजना है।
16 जिलों में पार्टी कमजोर
2025 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने प्लानिंग की थी कि हर जिलें में कम से कम एक विधायक हों। नतीजे आए तो 8 ऐसे जिले मिले जहां बीजेपी के एक भी विधायक नहीं हैं। 8 ऐसे जिले हैं, जहां बीजेपी के मात्र 1 विधायक हैं।
गठबंधन की सियासत के कारण बीजेपी अभी तक पूरे बिहार की पार्टी नहीं बन पाई है। कई ऐसे जिले हैं, जहां बीजेपी संगठन के तौर पर बहुत मजबूत है, लेकिन सीटें गठबंधन के लिए छोड़नी पड़ जाती हैं, जबकि कई जिले ऐसे हैं जहां चुनाव नहीं लड़ने के कारण पार्टी संगठन नहीं खड़ा कर पा रही है।
हालात ये हैं कि विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का दावा करने वाली बीजेपी राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर अपने दम पर कैंडिडेट उतारने की स्थिति में नहीं है। अब इस तिकड़ी पर पार्टी की समस्या के समाधान की जिम्मेदारी होगी।
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