Bihar news: बिहार की राजनीति में बंगलों को लेकर चल रहा विवाद गहराता जा रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री का आधिकारिक निवास केवल ‘1 अणे मार्ग’ (लोक सेवक आवास) ही रहेगा। राज्य सरकार ने पहले 5 देशरत्न मार्ग को 1 अणे मार्ग परिसर में जोड़कर उसे मुख्यमंत्री आवास का विस्तार देने का निर्णय लिया था जिसे अब आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया गया है।
सरकार का यू-टर्न और कानूनी पेंच
5 देशरत्न मार्ग को मुख्यमंत्री आवास परिसर से अलग करने का यह निर्णय विपक्ष के विरोध और कानूनी जटिलताओं के बाद आया है। राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने याद दिलाया कि वर्ष 2019 में स्वयं बिहार सरकार ने पटना उच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर 5 देशरत्न मार्ग को उपमुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास घोषित किया था। सरकार के इस कदम को पुरानी गलतियों को सुधारने और विवाद को शांत करने की दिशा में देखा जा रहा है।
राबड़ी देवी बनाम सम्राट चौधरी: तल्ख बयानबाजी
विवाद का मुख्य केंद्र पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का 10, सर्कुलर रोड स्थित आवास है, जिसे सरकार ने खाली करने का नोटिस दिया है। इस बंगले को पशुपालन मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया गया है। राबड़ी देवी ने इसे चुनौती देते हुए कहा है कि वे किसी भी कीमत पर अपना आवास खाली नहीं करेंगी। उन्होंने तल्ख लहजे में सरकार को खुली चुनौती दी है कि यदि हिम्मत है तो फोर्स बुलाकर उन्हें जबरन बाहर निकाल दें।
बंगला किसी की बपौती नहीं
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने बिना नाम लिए लालू परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगला किसी की बपौती नहीं है। उन्होंने अपनी सादगी का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार मंत्री और गृहमंत्री रहने के बावजूद वे हमेशा सामान्य आवासों में रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में पद और आवास जनता की सेवा के लिए होते हैं, न कि किसी के मोह या कब्जे के लिए। सीएम ने साफ कर दिया कि नियमानुसार सरकारी आवास खाली कराने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
इस पूरे प्रकरण ने बिहार की सत्ता और विपक्ष के बीच बंगलों की राजनीति को एक बार फिर गर्म कर दिया है। जहां एक ओर सरकार इसे सुशासन और प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है वहीं विपक्ष इसे बदले की कार्रवाई करार दे रहा है।

