कुंदन कुमार/पटना। भारतीय राजनीति में अक्सर वीआईपी संस्कृति और काफिले की लंबाई चर्चा का विषय रहती है, लेकिन बिहार की सियासत से एक अनुकरणीय उदाहरण सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और संसाधनों के मितव्ययी उपयोग की अपील का असर अब बिहार के सत्ता गलियारों में स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।

​काफिले में कटौती: 19 से सीधे 3 गाड़ियां

​बिहार के मुख्यमंत्री की भूमिका में सक्रिय सम्राट चौधरी अपनी कार्यशैली में बड़े बदलाव की शुरुआत कर चुके हैं। गौरतलब है कि महज एक दिन पहले तक सम्राट चौधरी का काफिला 19 गाड़ियों के साथ सड़कों पर दौड़ता था। मीडिया में इस खबर के आने और प्रधानमंत्री की अपील के बाद, सम्राट चौधरी ने त्वरित संज्ञान लेते हुए अपनी ‘गलती’ को सुधारा। आज जब वे पटना से दरभंगा के लिए रवाना होने पटना एयरपोर्ट पहुंचे, तो वहां का नजारा बदला हुआ था। भारी-भरकम लाव-लश्कर की जगह वे मात्र 3 गाड़ियों के छोटे से काफिले के साथ पहुंचे।

​संजय झा और संजय सरावगी भी रहे साथ

​सम्राट चौधरी के साथ जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी भी दरभंगा के लिए रवाना हुए। इस दौरान किसी भी प्रकार का ताम-झाम या अतिरिक्त सुरक्षा घेरे का अनावश्यक प्रदर्शन नहीं देखा गया। नेताओं का यह व्यवहार स्पष्ट संदेश देता है कि वे जनता और प्रधानमंत्री की भावनाओं का सम्मान कर रहे हैं।

​मितव्ययिता और सुशासन का संदेश

​प्रधानमंत्री मोदी ने अक्सर ऊर्जा संरक्षण और ईंधन की बचत पर जोर दिया है। बिहार के दिग्गज नेताओं द्वारा इस तरह के कदम उठाना न केवल सरकारी संसाधनों की बचत है, बल्कि आम जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश भी है। राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव की सराहना हो रही है। जानकारों का मानना है कि यदि शीर्ष नेतृत्व इस तरह की सादगी अपनाता है, तो इससे प्रशासन के निचले स्तर तक अनुशासन और बचत की संस्कृति विकसित होती है।
​सम्राट चौधरी ने अपने स्तर से प्रधानमंत्री के विजन को लागू कर यह साबित कर दिया है कि वे केवल निर्देशों का पालन ही नहीं करते, बल्कि उसे अपने व्यक्तिगत आचरण में भी ढालते हैं।