कुंदन कुमार/पटना: बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव गुरुवार को पटना स्थित एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में सशरीर उपस्थित हुए। यह मामला कोरोना काल के दौरान सरकारी नियमों के उल्लंघन और राघोपुर में भीड़ जुटाने से संबंधित था। कोर्ट की कार्यवाही के बाद तेजस्वी यादव को इस मामले में जमानत (बेल) मिल गई है।
क्या है पूरा मामला?
कोरोना महामारी के दौरान जब पूरे देश में कड़े प्रतिबंध लागू थे, उस समय तेजस्वी यादव के खिलाफ वैशाली जिले के राघोपुर में भारी भीड़ इकट्ठा करने और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को तोड़ने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्रशासन का आरोप था कि उन्होंने आपदा प्रबंधन अधिनियम की धाराओं का उल्लंघन किया। इसी मामले में सुनवाई के लिए उन्हें कोर्ट द्वारा समन जारी किया गया था।
’सरकार की कुव्यवस्था के खिलाफ था हमारा धरना’
कोर्ट परिसर से बाहर निकलते हुए मीडिया से बातचीत में तेजस्वी यादव ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा:
”कोरोना काल में जब सरकार की कुव्यवस्था के कारण लोग मर रहे थे, तब हमने जनता की आवाज उठाने के लिए धरना दिया था। प्रशासन ने गलत तरीके से हम पर मुकदमा दर्ज किया था। आज उसी मामले में कोर्ट की तारीख थी, जिसमें हम शामिल हुए और माननीय न्यायालय ने हमें बेल दे दी है।”
कोर्ट की कार्यवाही और राहत
तेजस्वी यादव अपने वकीलों के साथ कोर्ट पहुंचे और कानून के प्रति सम्मान जताते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद तेजस्वी यादव को राहत प्रदान की। राजद कार्यकर्ताओं के लिए यह एक बड़ी राहत की खबर है, क्योंकि तेजस्वी लगातार इस मामले को राजनीतिक साजिश बताते रहे हैं।

