कुंदन कुमार/ पटना। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अपने हालिया कैमूर दौरे के दौरान राज्य की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करने का संकल्प लिया है। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा विभाग सरस्वती माता का मंत्रालय है जहां केवल शिक्षा और ज्ञान की आराधना होनी चाहिए। उन्होंने विभाग में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए चेतावनी दी कि जो लोग धन अर्जन (लक्ष्मी माता की आराधना) में रुचि रखते हैं, वे दूसरे विभागों में जा सकते हैं।

​शिक्षकों के लिए नई नीति: जिला कैडर और पोस्टिंग के नए नियम

​मंत्री ने शिक्षकों की कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित करने के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। अब शिक्षकों का जिला कैडर बनाया जाएगा, जिससे उनकी नियुक्ति उनके द्वारा चयनित जिले में ही सुनिश्चित होगी। बीच में जिला स्थानांतरण करने पर उनकी वरिष्ठता समाप्त हो जाएगी। इसके साथ ही, महिला शिक्षकों की सुविधा का ध्यान रखते हुए उनकी तैनाती उनके निकटतम पंचायत में की जाएगी, जबकि पुरुष शिक्षकों को निकटतम प्रखंड में पोस्टिंग मिलेगी।

​डिजिटल मॉनिटरिंग और छात्रों का सर्वांगीण विकास

​शिक्षा में सुधार के लिए अब शिक्षकों की उपस्थिति शिक्षा विभाग के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से दर्ज की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव शिक्षकों के मूल्यांकन का आधार छात्रों की प्रगति रिपोर्ट को बनाना है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि छात्रों की रुचि और बौद्धिक क्षमता (ब्रेन मैपिंग) के अनुसार उन्हें शिक्षा दी जाएगी ताकि वे डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जैसी मेधावी प्रतिभा बन सकें।

​सुविधाओं के साथ जवाबदेही

​शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि शिक्षकों की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाएगा लेकिन पठन-पाठन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब शिक्षक ससुराल जाने के बहाने नहीं, बल्कि बच्चों को पढ़ाने के लिए नियमित रूप से विद्यालय जाएंगे। प्रत्येक प्रखंड में एक मॉडल विद्यालय को विकसित किया जा रहा है और भूमिहीन स्कूलों की समस्याओं का समाधान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
​बिहार सरकार का यह कदम यदि जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू होता है तो राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक नई क्रांति आएगी। अब भविष्य ही बताएगा कि इन महत्वाकांक्षी सुधारों का क्रियान्वयन छात्रों को कितनी नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।