No insurance, No Fuel: अगर आपके पास बाइक-कार हैं और अगर आपने इश्योरेंस (बीमा) नहीं करवाया है तो ये खबर आपके लिए ही है। सरकार जल्द ही इश्योरेंस नहीं तो पेट्रोल नहीं योजना लागू करने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिया है कि नो इश्योरेंस, नो पेट्रोल (petrol) योजना जल्द से जल्द लागू करें। सड़क सुरक्षा को लेकर सुझाव देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश एक सड़क दुर्घटना से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें दुर्घटना में जान गंवाने वाले वाहन मालिक के परिवार को 10 लाख 500 रुपये और 7.5 प्रतिशत ब्याज के साथ मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
शीर्ष न्यायालय ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत गाड़ियों को उनके इंश्योरेंस स्टेटस से जोड़ा जाएगा, ताकि पेट्रोल पंप पर गाड़ियों के वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की जांच की जा सके। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के महत्व से जुड़े कई अहम निर्देश जारी किया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दो मुख्य मुद्दे तय किए हैं। पहला मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 146 का पालन न करना, जिसके तहत सभी गाड़ियों के लिए वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होना जरूरी है। दूसरा क्या थर्ड-पार्टी रिस्क कवरेज के अलावा गाड़ी में सवार सभी लोगों को कवर करने वाला एक समान मोटर-व्हीकल पॉलिसी स्ट्रक्चर होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि फ्यूल नहीं देने की व्यवस्था से दो फायदे होंगे। इससे बिना इंश्योरेंस या बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों की पहचान करने में मदद मिलेगी और वाहन मालिकों को वैध इंश्योरेंस कराने के लिए भी प्रेरित किया जा सकेगा।
पायलट-प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्दश
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को IRDA को MoRTH के साथ मिलकर एक पायलट-प्रोजेक्ट के तहत योजना को शुरू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत गाड़ियों के लिए फ्यूल को वैलिड इंश्योरेंस स्टेटस से जोड़ा जाएगा। ऐसा न होने पर, संबंधित गाड़ी को पेट्रोल पंप पर तब तक फ्यूल नहीं दिया जाएगा, जब तक कि वैलिड इंश्योरेंस न मिल जाए।

56 प्रतिशत वाहन बिना इंश्योरेंस के चल रहे
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में 30.48 करोड़ वाहन हैं। इनमें से 16.54 करोड़ यानी करीब 56 प्रतिशत वाहन बिना इंश्योरेंस के चल रहे हैं। इसका परिणाम यह होता है कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा देने का वैधानिक संरक्षण या तो विलंबित हो जाता है या कई मामलों में निष्प्रभावी हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत अनिवार्य इंश्योरेंस का उद्देश्य केवल सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजा दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें लंबी कानूनी लड़ाई से भी बचाना है।
बीमा अवधि में बदलाव
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2018 में उसने नए चार पहिया वाहनों के लिए खरीद या रजिस्ट्रेशन के समय 3 साल और दोपहिया वाहनों के लिए 5 साल वर्ष की ‘थर्ड पार्टी’ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना अनिवार्य किया था। कोर्ट ने कहा कि उस निर्देश के 8 साल बाद भी बड़ी संख्या में वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं। हालांकि IRDAI और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने इस अवधि को न बढ़ाने की सिफारिश की है, लेकिन कोर्ट का मत है कि सड़क सुरक्षा के हित में इस अवधि को एक साल बढ़ाया जाना चाहिए।
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