कुंदन कुमार/पटना। बिहार की राजधानी अब फिल्म निर्माण के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। पटना के पाटलिपुत्र इंडस्ट्रियल एरिया स्थित बियाडा भवन में एसोसिएशन ऑफ सिनेमैटिक टेक्नोलॉजी एंड आर्ट द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण संवाददाता सम्मेलन में बिहार को हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों के पोस्ट-प्रोडक्शन हब के रूप में विकसित करने की जोरदार मांग उठाई गई।
तकनीकी कौशल में बिहार का लोहा
संघ के चेयरमैन देवेन्द्र सिंह ने बताया कि पिछले तीन दशकों से बिहार के प्रतिभावान तकनीशियन वैश्विक स्तर की फिल्मों में पर्दे के पीछे रहकर काम कर रहे हैं। बिहार के कलाकार हॉलीवुड और बॉलीवुड के बड़े स्टूडियोज में VFX, 3D और कलर ग्रेडिंग जैसे जटिल कार्यों में 25 से 30 प्रतिशत तक का योगदान दे रहे हैं। ‘मुगल-ए-आजम’ और ‘शोले’ के कलर-वर्जन से लेकर ‘टाइटैनिक’, ‘ट्रांसफॉर्मर’ और ‘श्रेक’ जैसी विश्व प्रसिद्ध फिल्मों में बिहार के युवाओं की तकनीकी प्रतिभा का जादू साफ दिखता है।
उद्योग का दर्जा और सरकारी संरक्षण की जरूरत
महासचिव अभिमन्यु प्रताप सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि पर्याप्त सरकारी सहयोग और उचित नीतिगत ढांचे के अभाव में यह क्षेत्र अब तक अपनी वास्तविक पहचान नहीं बना सका है। उन्होंने कहा यदि सरकार इस क्षेत्र को ‘उद्योग’ का दर्जा प्रदान करे और बड़े स्टूडियो के साथ समन्वय स्थापित करे, तो बिहार जल्द ही भारत का सबसे बड़ा पोस्ट-प्रोडक्शन केंद्र बनकर उभरेगा। यह पहल न केवल राज्य में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करेगी, बल्कि स्थानीय प्रतिभाओं के पलायन को भी रोकेगी।
फिल्म सिटी: एक दूरदर्शी आवश्यकता
संवाददाता सम्मेलन में बिहार में एक आधुनिक फिल्म सिटी के निर्माण की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया गया। जानकारों का मानना है कि एक विश्व स्तरीय फिल्म सिटी बनने से न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर के पोस्ट-प्रोडक्शन कार्य पटना में आएंगे, बल्कि इससे पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
कोषाध्यक्ष रणवीर शर्मा ने आशा व्यक्त की कि सरकार VFX, 3D और कलराइजेशन जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों को गंभीरता से लेगी। इस अवसर पर अभिनेता अमित रंजन की मौजूदगी ने भी इस मांग को मजबूती प्रदान की। यदि बिहार सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है, तो पटना आने वाले समय में फिल्म निर्माण की दुनिया में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह न केवल आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि वैश्विक पटल पर बिहार की गौरवशाली छवि को भी स्थापित करेगा।

