दिल्ली सरकार ने विकासपुरी स्थित एक निजी स्कूल के प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शिक्षा निदेशालय (DoE) द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में स्कूल में छात्रों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरे, वित्तीय अनियमितताएं और प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर तथ्य यह पाया गया कि स्कूल बिना अग्नि सुरक्षा स्वीकृति (फायर NOC) के 43 कक्षाओं का संचालन कर रहा था। शिक्षा निदेशालय ने इसे छात्रों की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही बताते हुए स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगा है।
निरीक्षण के दौरान पता चला कि स्कूल बिना अग्नि सुरक्षा स्वीकृति (फायर NOC) के 43 कक्षाओं का संचालन कर रहा था। इसके अलावा परिसर में बड़े पैमाने पर अवैध टिन-शेड संरचनाएं भी बनाई गई थीं, जो सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं पाई गईं।
कई गंभीर अनियमितताएं आईं सामने
शिक्षा निदेशालय की जांच में यह भी सामने आया कि स्कूल प्रबंधन बिना आवश्यक अनुमति के भूजल का दोहन कर रहा था। इसके साथ ही शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं दिए जाने, अभिभावकों पर मनमाने तरीके से फीस वृद्धि का बोझ डालने और वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं का संचालन बिना वैध मान्यता के किए जाने जैसी गंभीर शिकायतें भी पाई गईं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, ये अनियमितताएं न केवल शिक्षा संबंधी नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं।
शिक्षा मंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने शिक्षा निदेशालय को स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस का जवाब देने के लिए 7 दिनों का समय दिया है। अधिकारियों के अनुसार, यदि निर्धारित अवधि के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो सरकार स्कूल का तत्काल अधिग्रहण करने सहित कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई कर सकती है।
बच्चों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं: आशीष सूद
मामले को लेकर शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी। यह स्कूल बिना अग्नि सुरक्षा स्वीकृति के दर्जनों अवैध कक्षाओं का संचालन कर हजारों विद्यार्थियों के जीवन को प्रतिदिन खतरे में डाल रहा था।” उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी शैक्षणिक संस्थान को नियमों की अनदेखी करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सरकार कार्रवाई करने में नहीं करेगी संकोच
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा, “जब कोई संस्था खतरनाक और अवैध निर्माण करती है, सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग करती है, शिक्षकों का शोषण करती है तथा कानून की खुलेआम अवहेलना करती है, तब सरकार निर्णायक कार्रवाई करने में कोई संकोच नहीं करेगी।” उन्होंने आगे कहा कि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर सरकार विद्यालय के प्रबंधन का पूर्ण अधिग्रहण करने के लिए भी तैयार है।
निरीक्षण में सामने आए प्रमुख उल्लंघन
1. अग्नि सुरक्षा और भवन निर्माण संबंधी गंभीर अनियमितताएं
निरीक्षण में पाया गया कि स्कूल के पास केवल 39 कमरों के लिए फायर एनओसी थी, जबकि परिसर में कुल 82 कमरों का संचालन किया जा रहा था। यानी 43 कक्षाएं बिना किसी फायर एनओसी के चलाई जा रही थीं। इसके अलावा स्कूल ने बिना अनुमति 30 कमरों वाला विशाल टिन-शेड, एक अवैध बेसमेंट और तीसरी मंजिल का निर्माण भी कर रखा था।
2. आपातकालीन निकासी मार्ग अवरुद्ध
जांच के दौरान कुछ कक्षाओं में केवल एक ही निकास द्वार मिला। वहीं अग्निशमन वाहनों और अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए निर्धारित रास्ते भी पूरी तरह अवरुद्ध पाए गए। अधिकारियों ने इसे सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर खतरा बताया है।
3. भूजल का अवैध दोहन
स्कूल परिसर में बिना किसी वैधानिक अनुमति के बोरवेल संचालित किया जा रहा था। जांच रिपोर्ट के अनुसार यह पर्यावरणीय नियमों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
4. मान्यता समाप्त होने के बाद भी चल रही थीं कक्षाएं
शिक्षा विभाग के अनुसार, स्कूल की वरिष्ठ माध्यमिक स्तर की अस्थायी मान्यता 31 मार्च 2023 को समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद पिछले तीन वर्षों से वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं का संचालन जारी रखा गया। अधिकारियों का कहना है कि इससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता था।
5. अवैध शुल्क वृद्धि और अतिरिक्त वसूली
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि स्कूल ने शिक्षा निदेशालय की अनुमति के बिना कई बार फीस बढ़ाई। कोविड-19 महामारी के दौरान भी 20 से 25 प्रतिशत तक शुल्क वृद्धि की गई। इसके अलावा ‘स्मार्ट क्लासरूम शुल्क’ को मनमाने तरीके से दोगुना कर अभिभावकों से अतिरिक्त राशि वसूली गई।
6. शिक्षकों का शोषण
रिपोर्ट के अनुसार, पर्याप्त वित्तीय अधिशेष होने के बावजूद शिक्षकों को सरकारी वेतनमान के अनुरूप वेतन नहीं दिया गया। कई मामलों में वेतन भुगतान चार-चार महीने तक लंबित रखा गया, जिससे शिक्षकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
7. प्रबंधन में पारदर्शिता का अभाव
जांच में पाया गया कि स्कूल की मैनेजमेंट कमेटी में एक ही परिवार के करीबी रिश्तेदारों का वर्चस्व था, जिससे हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई। निरीक्षण के दौरान कई आवश्यक पहचान और प्रशासनिक दस्तावेज भी सत्यापन के लिए उपलब्ध नहीं कराए गए।
प्रस्तावित कठोर कार्रवाई
शिक्षा निदेशालय ने स्कूल प्रबंधन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसके खिलाफ निम्नलिखित कार्रवाई क्यों न की जाए
विद्यालय का सरकारी अधिग्रहण
दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम (DSEA), 1973 की धारा 20 के तहत विद्यालय के प्रबंधन का तत्काल सरकारी अधिग्रहण किया जा सकता है। यदि स्कूल प्रबंधन संतोषजनक जवाब देने में विफल रहता है, तो सरकार सीधे प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है।
भूमि पट्टा रद्द करने की सिफारिश
शिक्षा निदेशालय ने यह भी कहा है कि अत्यंत रियायती दर पर आवंटित सार्वजनिक भूमि के दुरुपयोग को देखते हुए स्कूल की लीज निरस्त करने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को अनुशंसा की जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो स्कूल के लिए जमीन पर अधिकार बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
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