दिल्ली के पालम इलाके में 18 मार्च को हुए भीषण अग्निकांड, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई थी, को लेकर मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में हादसे के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली फायर सर्विस (Fire Department ) की गंभीर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया गया है। साथ ही जांच में इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली और तकनीकी दक्षता पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आग लगने की घटना की जांच करने वाले असिस्टेंट इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर के पास पर्याप्त तकनीकी प्रशिक्षण नहीं था। जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने इससे पहले जिन आधा दर्जन आगजनी की घटनाओं की जांच की थी, उनमें से किसी में भी आग लगने के वास्तविक कारणों का पता नहीं लगाया जा सका था।

दक्षिण-पश्चिम जिले के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) ने 85 पेज की विस्तृत जांच रिपोर्ट दिल्ली सरकार के गृह विभाग को सौंप दी है। रिपोर्ट में हादसे के पीछे कई गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी खामियों की ओर इशारा किया गया है। जांच रिपोर्ट में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की नियामक कमियों, इलाके में फैले अवैध ओवरहेड बिजली केबलों और दिल्ली फायर सर्विस की कार्यप्रणाली में खामियों को प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित विभागों की ओर से सुरक्षा मानकों के अनुपालन और निगरानी में गंभीर चूक हुई, जिससे हादसे का जोखिम बढ़ गया।

रिपोर्ट के अनुसार, आग संभवतः इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर लगे एमसीबी (MCB) बॉक्स के पास हुए शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई थी। आग लगने के बाद भवन में रखे ज्वलनशील सामान ने उसे तेजी से फैलने में मदद की। जांच में पता चला कि इमारत में कॉस्मेटिक उत्पादों का बड़ा स्टॉक रखा हुआ था, जिसके कारण आग ने कुछ ही समय में पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया।

रेस्क्यू ऑपरेशन में सामने आईं गंभीर खामियां

जांच रिपोर्ट में दिल्ली फायर सर्विस के बचाव अभियान पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची इमारतों में बचाव कार्य के लिए इस्तेमाल होने वाला ट्रक-माउंटेड एरियल प्लेटफॉर्म ‘ब्रोंटो स्काईलिफ्ट’ मौके पर पहुंचा था, लेकिन शुरुआती इस्तेमाल के दौरान तकनीकी खराबी आने से वह प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सका। गवाहों और दमकल अधिकारियों के बयानों के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रोंटो स्काईलिफ्ट के बूम में किसी केबल या तार के फंस जाने की वजह से मशीन ने काम करना बंद कर दिया था। इस तकनीकी खराबी के कारण बचाव अभियान प्रभावित हुआ और दमकलकर्मियों को लोगों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

वैकल्पिक योजना नहीं होने से बढ़ी देरी

रिपोर्ट का सबसे गंभीर निष्कर्ष यह है कि ब्रोंटो स्काईलिफ्ट के खराब होने के बाद अधिकारियों के पास कोई प्रभावी वैकल्पिक योजना या बचाव का दूसरा साधन मौजूद नहीं था। इसके चलते रेस्क्यू ऑपरेशन में महत्वपूर्ण समय बर्बाद हुआ।जांच रिपोर्ट के अनुसार, जब तक दूसरी ब्रोंटो स्काईलिफ्ट मौके पर पहुंची, तब तक काफी देर हो चुकी थी। इससे बचाव कार्य की गति प्रभावित हुई और स्थिति को नियंत्रित करने में अतिरिक्त चुनौतियां सामने आईं।

 रिपोर्ट के आधार पर होंगे सुधारात्मक कदम

दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच रिपोर्ट में सामने आई कमियों के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। दमकल विभाग को अधिक सक्षम बनाने के लिए हाल ही में 500 से अधिक कर्मचारियों की भर्ती की गई है। इसके साथ ही आधुनिक उपकरणों और संसाधनों की खरीद प्रक्रिया भी जारी है, ताकि भविष्य में ऐसी आपात स्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

मालवीय नगर अग्निकांड की रिपोर्ट भी जल्द

दिल्ली सरकार के अनुसार, जून महीने में मालवीय नगर में हुए अग्निकांड की भी मजिस्ट्रेट जांच जारी है। दक्षिण जिले के जिला मजिस्ट्रेट लक्ष्य सिंघल इस मामले की जांच कर रहे हैं और कई लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस हादसे से जुड़ी जांच भी अंतिम चरण में है और इसकी रिपोर्ट जल्द सामने आ सकती है।

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