Property Aadhaar Card: दिल्ली में अब हर मकान और जमीन की एक अलग पहचान होगी। दिल्ली सरकार जल्द ही ‘लैंड रिकॉर्ड बिल 2026’ लाने जा रही है, जिसके तहत राजधानी की सभी संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाएगा और प्रत्येक प्रॉपर्टी के लिए एक यूनिक पहचान ( unique identity) पत्र यानी ‘प्रॉपर्टी आधार कार्ड'(Property Aadhaar Card) तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने गुरुवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि इस पहल का उद्देश्य दिल्ली के भूमि और संपत्ति रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। इसके लिए शहर की हर जमीन और मकान का आधुनिक तकनीक की मदद से सर्वेक्षण किया जाएगा।

30 गांवों में सफल रहा पायलट प्रोजेक्ट

इस महत्वाकांक्षी योजना की नींव केंद्र सरकार की ‘स्वामित्व’ योजना के तहत किए गए पायलट प्रोजेक्ट से पड़ी है। दिल्ली के 30 गांवों में ‘स्वामित्व’ कार्ड परियोजना को सफलतापूर्वक लागू किया गया, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों की संपत्तियों का प्रमाणिक और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया। पायलट प्रोजेक्ट से मिले सकारात्मक परिणामों के बाद अब दिल्ली सरकार पूरे शहर में जमीन और संपत्तियों का आधुनिक डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रही है। सरकार का मानना है कि इससे संपत्ति स्वामित्व से जुड़े विवाद कम होंगे और रिकॉर्ड प्रबंधन अधिक पारदर्शी बनेगा।

डिजिटल होगा पूरा भूमि रिकॉर्ड

प्रस्तावित ‘लैंड रिकॉर्ड बिल 2026’ के तहत आधुनिक तकनीक की मदद से भूमि और भवनों का सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके बाद सभी रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे नागरिकों को अपनी संपत्ति से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में आसानी होगी। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन और मकानों की खरीद-बिक्री, रिकॉर्ड सत्यापन, नामांतरण और अन्य राजस्व संबंधी प्रक्रियाएं अधिक सरल और तेज होंगी। साथ ही फर्जीवाड़े और स्वामित्व संबंधी विवादों पर भी प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

जल्द कैबिनेट के सामने आएगा बिल

मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, ‘दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल 2026’ को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। हालांकि आगामी विधानसभा मॉनसून सत्र में इस विधेयक के पेश होने की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन सरकार इसे पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है।

हर संपत्ति का होगा वैज्ञानिक सर्वेक्षण

प्रस्तावित कानून लागू होने के बाद दिल्ली की हर संपत्ति का आधुनिक तकनीक की मदद से वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाएगा। सर्वेक्षण के आधार पर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे और प्रत्येक प्रॉपर्टी को एक यूनिक पहचान संख्या आवंटित की जाएगी। इसी पहचान के आधार पर ‘प्रॉपर्टी आधार कार्ड’ जारी किया जाएगा, जिसमें संपत्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज होगी।

संपत्ति विवादों में आएगी कमी

सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से जमीन और मकानों के स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड अधिक सटीक और पारदर्शी बनेंगे। इससे संपत्ति विवादों, फर्जीवाड़े और रिकॉर्ड में गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही खरीद-बिक्री, नामांतरण, रिकॉर्ड सत्यापन और अन्य राजस्व संबंधी प्रक्रियाएं भी पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज होंगी।

क्या बोलीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “जिस तरह आधार कार्ड हर नागरिक की पहचान बताता है, ठीक उसी तरह दिल्ली में हर प्रॉपर्टी को सुरक्षित और प्रमाणिक डिजिटल पहचान मिलेगी।” उन्होंने बताया कि ‘स्वामित्व’ योजना के तहत 30 गांवों में ड्रोन सर्वे और आधुनिक तकनीक की मदद से स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए गए हैं। अब इस सफल अनुभव के आधार पर पूरे शहर में जमीन और संपत्तियों का सर्वेक्षण किया जाएगा।

हर बिल्डिंग और फ्लोर का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि प्रस्तावित ‘दिल्ली लैंड बिल’ के तहत यह प्रक्रिया केवल गांवों तक सीमित नहीं रहेगी। राजधानी की सभी रिहायशी, व्यावसायिक और अन्य प्रकार की संपत्तियों को इसमें शामिल किया जाएगा। योजना के तहत हर इमारत के प्रत्येक फ्लोर का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, ताकि कोई भी प्रॉपर्टी इस प्रक्रिया से बाहर न रहे। इससे संपत्तियों का सटीक और प्रमाणिक डेटा उपलब्ध हो सकेगा।

प्रॉपर्टी आधार कार्ड से क्या होंगे फायदे?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दशकों से भूमि रिकॉर्ड की व्यवस्थित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को मालिकाना हक साबित करने, संपत्ति की खरीद-बिक्री, उत्तराधिकार, बैंक लोन, भवन नक्शा मंजूरी और अदालतों में लंबित मामलों के निपटारे में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रमाणित डिजिटल संपत्ति रिकॉर्ड उपलब्ध होंगे। इससे रिकॉर्ड संबंधी अस्पष्टता दूर होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और जमीन-जायदाद से जुड़े विवादों में काफी कमी आएगी। साथ ही प्रॉपर्टी लेन-देन और सरकारी प्रक्रियाएं भी अधिक आसान और तेज हो जाएंगी।

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