कुंदन कुमार, पटना। बिहार सरकार ने राज्य में सुशासन, डिजिटल प्रशासन और जनशिकायतों के समाधान को लेकर बड़े और अहम दावे किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो० सोहेल के अनुसार, मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में क्रांतिकारी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों को घर बैठे सरकारी सेवाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से मिल रहा है। प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है।
सहयोग शिविर और डिजिटल निगरानी
सरकार की एक बेहद अभिनव पहल के रूप में सहयोग शिविर की शुरुआत 19 मई को की गई थी। इस विशेष व्यवस्था के तहत अब तक कुल 5,83,886 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 5,33,904 मामलों का सफलतापूर्वक समाधान किया जा चुका है। शेष बचे मामलों पर भी तेजी से कार्रवाई जारी है। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता इसकी डिजिटल प्रणाली है। तय समयसीमा पूरी होते ही कंप्यूटर स्वतः स्पष्टीकरण (ऑटो-एक्सप्लेनेशन) जारी कर देता है, जिसके बाद संबंधित अधिकारी को ऑनलाइन जवाब देना अनिवार्य होता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अब तक इस प्रक्रिया में किसी भी अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं पड़ी है, जो प्रशासनिक सतर्कता को दर्शाता है।
आरटीपीएस (RTPS) और ऑटो अपील सिस्टम
बिहार लोक सेवा अधिकार अधिनियम (RTPS) के अंतर्गत राज्य में अब तक 53.80 करोड़ से अधिक आवेदनों का रिकॉर्ड निपटारा किया गया है। जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और श्रमिक (मजबूर) पंजीकरण जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण सेवाओं में ऑटो अपील सिस्टम लागू कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन का निष्पादन नहीं होता है, तो वह स्वतः उच्चाधिकारी के पास अपील में चला जाता है। 23 और 26 जुलाई से शुरू हुई इस पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से पहले ही हजारों मामलों का स्वतः निस्तारण सुनिश्चित किया जा चुका है।
पंचायत स्तर तक डिजिटल सेवाओं का विस्तार
सरकार ने अपनी सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए राज्य की सभी पंचायत सरकार भवनों में 64 से अधिक प्रकार की ऑनलाइन सेवाएं सुलभ करा दी हैं। इसके अलावा, लोक शिकायत निवारण अधिनियम के तहत अब तक 19.38 लाख से अधिक शिकायतों का समाधान किया गया है। विशेष रूप से सरकारी और सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) कर्मचारियों के लिए बनाई गई पृथक शिकायत निवारण प्रणाली के जरिए भी 16,106 शिकायतों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया है।
मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना और सरकारी नियुक्तियां
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए आईआईएम (IIM) बोधगया के साथ एक एमओयू (MoU) साइन किया गया है। इसके तहत मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के अंतर्गत 107 विशेषज्ञ विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जो आधुनिक प्रबंधन तकनीकों के आधार पर विभागों को मजबूत बना रहे हैं। रोजगार के मोर्चे पर भी सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। वर्ष 2025-26 और 2026-27 के दौरान कुल 1,72,218 रिक्त पदों की अधियाचना विभिन्न भर्ती आयोगों और चयन संस्थाओं को भेजी जा चुकी है, जिन पर नियुक्ति प्रक्रिया निरंतर जारी है।
मानव संसाधन प्रबंधन और जिज्ञासा केंद्र
राज्य के लगभग 8 लाख कर्मचारियों का पूरा डेटा मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) पर ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया गया है। इसके जरिए कर्मचारियों के वेतन, सेवा विवरण और उनकी संपत्ति से जुड़ी जानकारियों का डिजिटल प्रबंधन किया जा रहा है। इसके साथ ही, आम जनता की सहायता के लिए स्थापित ‘जिज्ञासा केंद्र’ के टोल-फ्री नंबर के माध्यम से अब तक 12,93,887 मामलों में लोगों को जानकारी और सहायता प्रदान की गई है। सरकार इन सभी पहलों के जरिए यह सुनिश्चित कर रही है कि बिहार का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह आधुनिक, भ्रष्टाचार मुक्त और जनहितैषी बने।


