पटना। बिहार की राजनीति में बुधवार का दिन काफी गहमागहमी भरा रहा। राजधानी पटना स्थित जदयू कार्यालय में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का जनता दरबार आयोजित किया गया जहां समस्याओं के समाधान की उम्मीद में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इस दौरान जहां स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली पर सवाल उठाए वहीं शिक्षक बहाली की राह देख रहे अभ्यर्थियों ने अपनी पीड़ा साझा की।
बोगो सिंह ने सरकार पर साधा निशाना
मटिहानी के राजद विधायक बोगो सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष अपने क्षेत्र के अस्पतालों की दयनीय स्थिति का मुद्दा उठाया। बोगो सिंह ने तल्ख लहजे में कहा कि पिछले छह महीनों से अस्पताल बदहाल स्थिति में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन अस्पतालों में कभी इलाज की उम्मीद की जाती थी आज वहां आवारा कुत्ते घूम रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या यही सुशासन की पहचान है? बोगो सिंह ने बताया कि उन्होंने स्वयं की लागत से क्षेत्र में अस्पताल बनवाए थे लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद से उनकी देखरेख का बुरा हाल है।
TRE-4 अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री को छोड़ स्वास्थ्य मंत्री से लगाई गुहार
दिलचस्प बात यह रही कि शिक्षक बहाली (TRE-4) के अभ्यर्थी शिक्षा मंत्री के बजाय स्वास्थ्य मंत्री के जनता दरबार में अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। अभ्यर्थियों ने बताया कि शुरुआत में 46 हजार पदों पर बहाली का वादा किया गया था लेकिन अब मात्र 20 हजार पदों की चर्चा हो रही है, जिससे युवाओं में भारी निराशा है। अभ्यर्थियों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि जब भी वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखते हैं तो उन्हें पुलिस की लाठियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट नीति की मांग की है।
जुलाई में आएगा नोटिफिकेशन: शिक्षा मंत्री
दूसरी ओर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अभ्यर्थियों को आश्वस्त किया है कि जुलाई में भर्ती का नोटिफिकेशन हर हाल में जारी कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि रिक्तियों की संख्या और अन्य विवरण उस समय स्पष्ट हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त शिक्षा विभाग बिहार के सभी प्रखंड कार्यालयों में पारदर्शिता लाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रहा है ताकि छात्रों को सरकारी कार्यों के लिए भटकना न पड़े।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन शिकायतों पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करती है क्योंकि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर जनता का भरोसा बहाल करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

