पटना। ​बिहार विधानसभा के वर्तमान सत्र के तीसरे दिन एक ऐतिहासिक और बड़े बदलाव के तहत राज्य सरकार ने 132 साल पुराने औपनिवेशिक जेल कानून को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। इसके स्थान पर अब आधुनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ‘बिहार कारा एवं सुधारात्मक सेवा विधेयक, 2026’ को लागू कर दिया गया है। सत्र के इस महत्वपूर्ण दिन कुल 13 अहम विधेयकों को सर्वसम्मति से हरी झंडी मिल गई है, जिनका उद्देश्य राज्य में अपराध नियंत्रण, प्रशासनिक सुधार और आर्थिक विकास को नई गति देना है।

​पैरोल पर फरार होने वाले बंदियों पर कसेगा शिकंजा

​पुराने नियमों के तहत कई बार कैदी पैरोल मिलने के बाद फरार हो जाते थे, जिससे कानून-व्यवस्था के समक्ष चुनौती खड़ी होती थी। नए कानून के लागू होने के बाद, शादी या परिजनों की मृत्यु जैसे विशेष कारणों से पैरोल पर जेल से बाहर जाने वाले बंदियों का भागना पूरी तरह असंभव हो जाएगा।

​सरकार अब ऐसे कैदियों के पैर में साइबेरियन पक्षियों की तरह अत्याधुनिक ट्रैकिंग डिवाइस स्थापित करेगी।
​इससे जेल प्रशासन और अधिकारी कैदी की हर पल की लोकेशन पर पैनी नजर रख सकेंगे।
​यदि कोई भी संदिग्ध गतिविधि या नियम विरुद्ध हरकत सामने आती है, तो पुलिस तुरंत एक्शन लेते हुए उसे दोबारा गिरफ्तार कर लेगी।

​सोशल मीडिया की अभद्रता और पेपर लीक अब गुंडा एक्ट के दायरे में

​सत्र के दौरान ‘बिहार अपराध नियंत्रण संशोधन विधेयक, 2026 (CCA)’ को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत कड़े प्रावधान किए गए हैं:

​सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभद्र भाषा का प्रयोग, गाली-गलौज और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक जैसे गंभीर कृत्य सीधे तौर पर ‘गुंडा एक्ट’ के अंतर्गत आएंगे।
​यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ एक मामले में चार्जशीट दाखिल होती है या तीन अलग-अलग शिकायतें दर्ज पाई जाती हैं, तो जिलाधिकारी (डीएम) को यह अधिकार होगा कि वे दोषी को 12 महीने के लिए तड़ीपार (जिला बदर) कर दें।
​यदि कोई व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सीधा गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाएगा।

​सत्र के तीसरे दिन पास किए गए प्रमुख 13 विधेयक और उनके लाभ

  • ​बिहार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026: इसके तहत सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है। ‘इन्वेस्ट बिहार सचिवालय’ सभी निवेश आवेदनों का नियमानुसार केवल 30 दिनों के भीतर निपटारा करेगा, जिससे राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
  • ​बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026: बुनियादी ढांचे और मानकों को पूरा न करने वाले निजी विश्वविद्यालयों पर सख्त लगाम लगेगी। मान्यता रद्द होने की स्थिति में सरकार खुद छात्रों की शिक्षा को पूरा कराएगी।
  • ​बिहार नगर विकास विधेयक, 2026: अनियंत्रित शहरीकरण को कानूनी दायरे में लाने के लिए एक नए नगर विकास प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, जो बुनियादी ढांचे के विकास और रखरखाव की देखरेख करेगा।
  • ​भारतीय स्टाम्प (बिहार संशोधन) विधेयक, 2026: संपत्ति का कम मूल्य दिखाकर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाने वालों पर शिकंजा कसेगा। ऐसा करना अपराध माना जाएगा और दोषियों पर बकाया स्टाम्प राशि के बराबर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
  • ​बिहार विशिष्ट विश्वविद्यालय विधेयक, 2026: इसके माध्यम से कंप्यूटर साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे आधुनिक और रोजगारपरक क्षेत्रों के लिए विशेष संस्थानों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा।
  • ​पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2026: ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें विज्ञापन शुल्क और होल्डिंग टैक्स वसूलने का अधिकार दिया गया है। साथ ही, बहुमंजिली इमारतों के निर्माण के लिए नक्शा पास कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • ​बिहार दुकान और प्रतिष्ठान निरसन विधेयक, 2026: कारोबार को सुगम बनाने के उद्देश्य से दुकानों के संचालन और रात्रि पाली (नाइट शिफ्ट) में महिलाओं के काम करने से जुड़े नियमों को काफी सरल बनाया गया है।
  • ​शहीद जुब्बा सहनी वास्तुकला विवि विधेयक, 2026: मुजफ्फरपुर में नए वास्तुकला विश्वविद्यालय की स्थापना से राज्य के युवाओं को स्थानीय स्तर पर आर्किटेक्चर की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बेहतरीन अवसर मिलेंगे।
  • ​बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक: तकनीकी शिक्षा और कुशल मैनपावर की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इसमें आवश्यक संशोधन किए गए हैं।
  • ​से 13. अन्य संबंधित विधेयक: इनमें शेष विश्वविद्यालय संशोधन और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं, जिन्हें राज्य के समग्र विकास, जीवन और जीविका की सुरक्षा को ध्यान में रखकर पारित किया गया है।