पटना। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार का दिन भारी हंगामे और तनावपूर्ण माहौल के नाम रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायक आपस में भिड़ गए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि विधायकों के बीच मारपीट की नौबत आ गई और मार्शल को बीच-बचाव करना पड़ा। इस भारी हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही महज आठ मिनट के भीतर ही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

​वो छात्र नहीं, राजनीतिक दलों के गुंडे थे – बीजेपी विधायक

​सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के विधायकों ने डाकबंगला चौराहे पर हुए छात्रों पर लाठीचार्ज के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसी दौरान बीजेपी विधायक श्याम बाबू यादव अपनी सीट से खड़े हुए और उन्होंने तीखा विरोध जताया।
​श्याम बाबू यादव ने सदन में अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा कि डाकबंगला चौराहे पर कल जो प्रदर्शन हुआ वे छात्र नहीं बल्कि गुंडे थे। मेरे और मेरे सुरक्षा गार्ड्स पर जानलेवा हमला किया गया। कल अगर सुरक्षा नहीं मिलती तो मेरी हत्या हो जाती। वे सभी किसी राजनीतिक दल के प्रायोजित गुंडे थे।

​वेल में पहुंचे विधायक, युद्ध के मैदान में बदला सदन

​बीजेपी विधायक के इस बयान के बाद सदन में आग में घी का काम हुआ। विपक्षी विधायक आक्रोशित होकर अपनी सीटों से उठकर सीधे वेल (Well) तक पहुंच गए। वहीं, बीजेपी विधायक भी पीछे नहीं रहे और वे भी वेल में आ गए।
​सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच हाथापाई और भिड़ने की स्थिति पैदा हो गई। दोनों तरफ से तीखी नोकझोंक के बीच मार्शल को तुरंत दखल देना पड़ा। मार्शल ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों के बीच बचाव किया और माहौल को शांत कराया।

​यह सदन है, युद्ध का मैदान नहीं – स्पीकर

​सदन के अंदर मचे इस घमासान के बीच विधानसभा स्पीकर ने विधायकों को संयम रखने की कड़ी हिदायत दी। स्पीकर ने चेतावनी देते हुए कहा, यह सदन है, कोई युद्ध का मैदान नहीं है।
​हालांकि, लगातार हो रहे शोरगुल और नारेबाजी के कारण सदन चलाना असंभव हो गया। परिणामस्वरूप, कार्यवाही शुरू होने के मात्र आठ मिनट के भीतर ही इसे दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। वहीं, विधान परिषद की स्थिति भी इससे अलग नहीं रही, जहां कार्यवाही मात्र 15 मिनट चलकर दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

​सदन के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन और इस्तीफे की मांग

​सदन के भीतर हंगामे से पहले परिसर के बाहर भी राजनीतिक सरगर्मी चरम पर थी। विपक्षी विधायक हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर विधानसभा के पोर्टिको और बाहर धरने पर बैठ गए।
​विपक्ष ने भाजपा हटाओ, शिक्षा बचाओ के नारों के साथ प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई।

विधायकों के हाथों में नारों और मुद्दों वाले बैनर देखे गए:

  • ​पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक क्यों हुए, भाजपा सरकार जवाब दे।
  • ​छात्रों की है एक ही मांग, पारदर्शी परीक्षा और सम्मान।
  • ​छात्रों पर पुलिस बर्बरता किसी भी कीमत पर नहीं चलेगी।
  • ​सड़क पर उतरे छात्र, न्याय की है सिर्फ एक बात।