पटना। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले अब विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य की 9 विधान परिषद सीटों और एक उपचुनाव को लेकर NDA ने लगभग अपना सीट शेयरिंग फॉर्मूला तैयार कर लिया है। बताया जा रहा है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी को फायदा होने जा रहा है, जबकि विपक्षी दल राजद और कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है। चुनाव आयोग कार्यक्रम की घोषणा हो गई है।
10 सीटों पर चुनाव की स्थिति बन रही है
दरअसल, विधान परिषद की जिन 9 सीटों का कार्यकाल 28 जून 2026 को समाप्त हो रहा है, उनमें जदयू की 3, राजद की 2, बीजेपी और कांग्रेस की 1-1 सीट शामिल है। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने के बाद खाली हुई सीट पर भी उपचुनाव होना है। ऐसे में कुल 10 सीटों पर चुनाव की स्थिति बन रही है।
सीट बंटवारे को लेकर सहमति बन चुकी
सूत्रों के मुताबिक, NDA के भीतर सीट बंटवारे को लेकर सहमति बन चुकी है। जदयू के हिस्से में चार सीटें रहेंगी, जबकि बीजेपी इस बार तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। इसके अलावा एक-एक सीट चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM को दिए जाने की चर्चा है। वहीं विपक्षी महागठबंधन के खाते में केवल एक सीट जाने की संभावना जताई जा रही है।
महागठबंधन केवल एक सीट पर कर सकता है दावा
राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से देखें तो विधान परिषद चुनाव में NDA की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है। बीजेपी के पास 89 और जदयू के पास 85 विधायक हैं। ऐसे में दोनों दल आसानी से अपने उम्मीदवारों को जीत दिलाने की स्थिति में हैं। दूसरी ओर महागठबंधन के पास पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण वह केवल एक सीट पर ही मजबूती से दावा कर सकता है।
एकमात्र सीट बचाने में सफल हो सकता है
इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा राजद नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के करीबी माने जाने वाले सुनील सिंह की सीट को लेकर है। उनका कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। यदि चुनाव बिना वोटिंग के सर्वसम्मति से होता है, तो राजद अपनी एकमात्र सीट बचाने में सफल हो सकता है।
विधान परिषद भेजने की चर्चा
उधर, NDA के भीतर नए चेहरों को मौका देने की रणनीति भी तैयार की जा रही है। बीजेपी की ओर से इस बार नए नेताओं को विधान परिषद भेजने की चर्चा है। पार्टी जातीय और सामाजिक समीकरण साधने के लिए ब्राह्मण, अति पिछड़ा और गैर-पिछड़ा वर्ग से नेताओं को मौका दे सकती है। वहीं जदयू भी मुस्लिम, दलित और EBC वर्ग से नए चेहरों को उच्च सदन भेजने की तैयारी में है। चर्चा यह भी है कि RLM कोटे से उपेंद्र कुशवाहा के बेटे को विधान परिषद भेजा जा सकता है। वहीं LJP(R) की ओर से चिराग पासवान के भांजे सीमांत मृणाल का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। इसके अलावा पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग मई के आखिरी सप्ताह या जून के पहले सप्ताह में विधान परिषद चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। ऐसे में बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में और भी हलचल बढ़ने की संभावना है।

